भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर निशाना साधने के एक दिन बाद अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि हमने एक सिलसिला शुरू किया है, जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। अगर गहन जांच की गई तो कई ऐसे सच सामने आएंगे जिससे सभी पार्टियों के नेताओं की मिलीभगत का कच्चा-चिठ्ठा खुल जाएगा। इससे पता चलेगा कि कैसे महाराष्ट्र में नेताओं के अपने उद्योग हैं, और वे सिंचाई के उद्देश्य के लिए बनाए गए बांधों का पानी इस्तेमाल करते हैं।
केजरीवाल ने साथ ही कहा कि खुद पर लगे आरोपों को गडकरी और कानून मंत्री सलमान खुर्शीद बेकार बता रहे हैं। अरविंद के अनुसार यह आरोप गडकरी के लिए बेकार हो सकते हैं, लेकिन उन किसानों के लिए नहीं जिन्होंने अपनी जमीन गंवाई है। आरोप भले ही खुर्शीद के लिए व्यर्थ हो सकते हैं, लेकिन उन विकलांगों के लिए नहीं, जिन्हें उपकरण चुरा लिए गए।
गडकरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा कि सिंचाई के लिए खरीदी जमीन का इस्तेमाल केवल जनहित में होना चाहिए। अगर राष्ट्रहित की बात है तो सिर्फ गडकरी ही क्यों, अगर विज्ञापन दिया गया होता तो ऐसे 1000 संगठन सामने आते जो अच्छा काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट साफ कहता है कि अगर किसी प्रोजेक्ट के लिए खरीदी गई अधिक भूमि की केवल नीलामी होगी और अन्य किसी व्यक्ति को यह नहीं दी जा सकती।
नेताओं और उद्योगपतियों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि गडकरी ने सिंचाई के लिए बांध के पानी का इस्तेमाल तय मकसद के लिए नहीं किए जाने पर सवाल क्यों नहीं उठाए। केजरीवाल के अनुसार ऐसा क्यों है कि जब हमने रॉबर्ट वाड्रा की बात की तो शरद यादव और अखिलेश यादव उनके बचाव में आ गए। यह क्या दिखाता है? केजरीवाल ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कहा था कि नेता एक-दूसरे के रिश्तेदारों पर निशाना नहीं साधते। इसका क्या मतलब है। क्या भ्रष्टाचार किसी व्यक्ति विशेष का मुद्दा नहीं है