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'अकादमी सम्मान लौटाना लेखकों का निजी निर्णय'

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प्रख्यात मलयालम लेखिका सारा जोसेफ और उर्दू उपन्यासकार रहमान अब्बास के अपने साहित्य अकादमी पुरस्कारों को लौटाने की घोषणा के बाद सरकार का भी पक्ष सामने आया है। सरकार का कहना है कि जिन लेखकों ने अपने पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है वह उनका व्यक्तिगत निर्णय है।
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केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने साहित्यकारों के विरोध और उनके अकादमी पुरस्कारों को वापस करने के मामले को उनका निजी फैसला बताया। उन्होंने कहा, 'साहित्य अकादमी प्रतिष्ठित और स्वायत्त संगठन है जो साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित करता है। यह सरकार के निर्देशों पर नहीं दिया जाता, इसलिए यदि कोई इनको वापस करने का फैसला लेता है तो यह पूरी तरह से उसकी निजी पसंद है।'
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'सरकार के निर्देशों पर नहीं दिया जाता पुरस्कार'

साहित्य अकादमी के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफा देने के मामले पर उन्होंने कहा कि परिषद में करीब 70 सदस्य हैं और इससे पहले भी दो-तीन सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, दादरी हत्या मामले से इस विरोध को जोड़ने पर उन्होंने कुछ कहने से साफ इनकार कर दिया। गौरतलब है कि पिछले साल कन्नड़ लेखक और तर्कशास्त्री एमएम कालबुर्गी की हुई हत्या के बाद देश के लेखकों में रोष की लहर है।

गौमांस खाने की अफवाह के बाद दादरी में हुई हत्या ने इस रोष को और बढ़ा दिया है जिसकी वजह से कई लेखक और साहित्यकारों ने विरोध स्वरुप या तो साहित्य अकादमी में अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया या फिर अकादमी पुरस्कारों को वापस करने की घोषणा की है। लेखकों के इस फैसले को मोदी सरकार और उसके शासन व्यवक्था की खामी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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