सरकार ने खाद्य सुरक्षा सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए मानसून सत्र का कार्यकाल पांच सितंबर तक बढ़ाने का फैसला किया है। इसकी घोषणा सरकार शुक्रवार को सभी दलों से सहमति बनाने के बाद करेगी।
जरूरी विधेयकों को निपटाने के लिए सरकार ने पहले ही कोलगेट मामले से जुड़ी फाइलों के गायब होने के मुद्दे पर चर्चा कराने और इस दौरान प्रधानमंत्री के सदन में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया था।
हालांकि कई दलों का कहना है कि तेलंगाना मामले में जारी गतिरोध को दूर किए बिना सत्र का समय बढ़ाने का कोई लाभ नहीं है।
दरअसल, वर्तमान सत्र में कई मुद्दों पर लगातार हुए हंगामे के चलते सरकार कई जरूरी विधेयकों को पारित नहीं करा पाई है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा विधेयक भी है, जिसे यूपीए सरकार गेमचेंजर मानती है।
सरकार के रणनीतिकार इस विधेयक को किसी भी कीमत पर इसी सत्र में पारित कराना चाहते हैं। अगर विधेयक पारित नहीं हुआ तो इससे संबंधित अध्यादेश अगले महीने के दूसरे हफ्ते में निष्प्रभावी हो जाएगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मानसून सत्र का समय बढ़ाने पर सरकार में सहमति बन गई है। सरकार पांच सितंबर तक सत्र का समय बढ़ाना चाहती है। हालांकि इसकी घोषणा शुक्रवार को विभिन्न दलों से बातचीत के बाद की जाएगी।