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कहीं फिर से न खराब हो जाए मानसून सत्र की हवा

Mon, 26 Aug 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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आंध्र प्रदेश के सांसदों के निष्कासन के बाद संसद में शांति की उम्मीदों पर 84 कोसी यात्रा मामले का विवाद पानी फेर सकता है।
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रविवार को उत्तर प्रदेश में यात्रा पर आमादा विहिप नेताओं और संतों की गिरफ्तारी का मामला सरकार के रणनीतिकारों के लिए नई परेशानी खड़ी कर सकता है। दरअसल यात्रा पर प्रतिबंध के बाद हुई गिरफ्तारी से भाजपा खासी खफा है।

पार्टी ने इस मसले को आगामी सोमवार को संसद के दोनों सदनों में जोरदार ढंग से उठाने की रणनीति बनाई है। अगर सरकार बीच का रास्ता नहीं निकाल पाई, तो सोमवार को लोकसभा में खाद्य सुरक्षा विधेयक पर चर्चा की राह में नया अड़ंगा लग सकता है।
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वैसे भी इस यात्रा पर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच रविवार को हुई तीखी जुबानी जंग ने संसद की कार्यवाही सुचारू ढंग से चलने की राह में रोड़े अटकाने के संकेत दिए हैं। हालांकि इस मुद्दे पर सत्र शुरू होने से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता विचार विमर्श करेंगे।

भाजपा उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा कि यात्रा पर प्रतिबंध लगा कर राज्य की सपा सरकार ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाई है। पूरे मामले में सपा और कांग्रेस की मिलीभगत है।

फिर रविवार को विहिप नेताओं और संतों को गिरफ्तार कर राज्य सरकार ने तानाशाही दिखाई है। ऐसे में निश्चित रूप से यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में जोरशोर से उठेगा।
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उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम चाहे वह किसी भी धर्म का हो, उसे धर्मगुरु तय करते हैं। मगर सपा सरकार ने नया उदाहरण पेश किया है कि धार्मिक कार्यक्रम का समय और स्थान संत के बदले शैतान तय करेंगे। फिर तानाशाही पर उतर आएंगे।

संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही पहले ही दिन से अलग-अलग मुद्दों पर हुए हंगामे की भेंट चढ़ती रही है।
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