अपनी खेती के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। इस साल तेज रफ्तार के चलते मानसून पूरे देश में अपनी 15 जुलाई की तय तिथि से हफ्ता भर पहले छा जाएगा।
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण पश्चिम मानसून से जुलाई में देश भर में 101 फीसदी, जबकि अगस्त में 96 फीसदी दीर्घकालीन औसत बारिश होगी।
उल्लेखनीय है कि चावल, मक्का, कपास, सोयाबीन जैसी खरीफ की फसलों के लिए मानसूनी बारिश काफी मायने रखती है। वैसे भी देश की साठ फीसदी से ज्यादा खेती इसी बारिश पर निर्भर है।
केरल में एक जून को आए मानसून के बाद से देश में अब तक 28 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है।
विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौड़ के अनुसार, ‘इस साल मानसून बहुत अच्छा है। यह अब तक देश के दो तिहाई हिस्से को ढंक चुका है। जब भी समय पर बुआई होती है तो फसलों का उत्पादन बेहतर होता है।’
उन्होंने बताया कि मानसून के समय से पहले पहुंचने पर बुआई जल्द हो सकेगी। खासकर पिछले साल से सूखा प्रभावित इलाकों में समय पर मोटे अनाजों की बुआई होने से इसका उत्पादन पर अच्छा असर पडे़गा।
यही नहीं धान की रोपाई में भी मानसून का समय से पहले पहुंचना काफी कारगर साबित होगा। राठौड़ ने कहा कि कपास और गन्ने जैसी लंबी अवधि वाली फसलों की सिंचाई की जरूरतें भी इस बारिश से पूरी हो पाएंगी। इससे जुताई की लागत में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि सूखा प्रभावित महाराष्ट्र में हुई मानसूनी बारिश अभी तक काफी अच्छी रही। यहां 32 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है।
विदर्भ में 96 फीसदी, मध्य महाराष्ट्र में 82 फीसदी, उत्तरी भीतरी कर्नाटक में 53 फीसदी और दक्षिणी भीतरी कर्नाटक में 41 फीसदी, जबकि सौराष्ट्र एवं कच्छ में 300 फीसदी ज्यादा बारिश हुई।
हालांकि, दक्षिण भारत के मुकाबले उत्तर पश्चिम इलाके में अपेक्षाकृत कम बारिश होने की संभावना जताई गई थी।
मौसम वैज्ञानिकों ने सीजन के दूसरे हिस्से में खासकर सितंबर में मानसून की अपनी रफ्तार पर कायम रहने पर आशंका जताई है।
उनका कहना है कि हिंद महासागर में प्रतिकूल परिस्थितियां विकसित होती देखी गईं हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि इस पर चिंतित होने की जरूरत नहीं है।