हिमालय की चोटियों पर हुई सामान्य से ज्यादा बर्फबारी का मजा हमने खूब उठाया। मगर इसका खामियाजा उत्तर भारत के राज्यों को भुगतना पड़ सकता है।
आशंका जताई जा रही है कि उत्तरी राज्यों को कम बारिश की समस्या से रूबरू होना पड़ सकता है। हालांकि मौसम विज्ञान विभाग का दावा है कि देश में मानसून सामान्य रहेगा।
मगर उत्तर-पश्चिम के राज्यों में मानसूनी बारिश भी सामान्य रहेगी या नहीं, अभी वे इसका जवाब देने को तैयार नहीं हैं।
मौसम को प्रभावित करने वाले आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि पाकिस्तान तथा भारत के उत्तर पश्चिमी राज्यों में इस बार मानसूनी बारिश औसत से भी कम रहेगी।
अनुमान है कि भारत में पंजाब, जम्मू, तथा आंशिक रूप से राजस्थान एवं हरियाणा में मानसूनी बारिश सामान्य से भी कम होगी।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री जयपाल रेड्डी ने शुक्रवार को दीर्घकालीन मौसम की घोषणा करते हुए कहा कि देश में मानसून सामान्य रहेगा।
उन्होंने चुटकी ली कि यह उनके लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की क्या स्थिति होगी, इस बारे में वे अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं बता सकते हैं।
मौसम विभाग के अधिकारी जो भी दावा करें लेकिन उनके द्वारा पेश किये गये आंकडे़ मानसून को लेकर उम्मीद कम आशंका ज्यादा पैदा करते हैं।
पिछले दिनों काठमांडू में हुई एक बैठक में भी एशियाई मौसम वैज्ञानिकों ने आशंका जताई थी कि बर्फबारी से इस साल पाकिस्तान तथा हिमालयी क्षेत्र में मानसून प्रभावित हो सकता है।
‘यह दीर्घकालीन मौसम का अनुमान है और सटीक जानकारी के लिए हमें मई तक इंतजार करना पड़ेगा। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाली स्थिति के बारे में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता।’
-शैलेश नायक, पृथ्वी विज्ञान विभाग के सचिव
अभी तटस्थ है स्थिति
पृथ्वी विज्ञान विभाग के सचिव शैलेश नायक का मानना है कि अभी स्थिति तटस्थ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून को तय करने वाले पांच प्रमुख कारक हैं, जिनमें से दो कारक अभी तक नकारात्मक स्थिति दर्शा रहे हैं।
मानसून की स्थिति को प्रभावित करने में भूमध्य रेखा के निकट दक्षिणी हिंद महासागर की सतह पर फरवरी से मार्च के बीच के तापमान की प्रमुख भूमिका रहती है। मौसम वैज्ञानिक इस साल के तापमान के आंकड़े को न तो अच्छा बता रहे हैं न ही खराब।
कम वायु दाब होना जरूरी
दक्षिणी पश्चिमी मानसून को हिंद महासागर से देश के भीतरी हिस्सों तक पहुंचाने में पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम तथा हिमालयी क्षेत्र में कम वायु दाब का होना जरूरी है।
जिस ढंग से हिमालयी रेंज में बर्फबारी हो रही है। उससे इन इलाकों में जून-जुलाई में भी हवायें ठंडी बनी रहेंगी। जबकि वायु दाब में कमी के लिए इस क्षेत्र को अधिक गर्म होना चाहिए।