नेपाल में बहने वाली मोहाना नदी देश का नक्शा बदल रही है। करीब पांच साल पहले कटान शुरू करने वाली इस नदी ने अब तहसील निघासन के दो गांवों चौगुर्जी और बकटोर्री को नेपाल का हिस्सा बना दिया है।
यही नहीं, नदी ने नेपाल सीमा से चार किलोमीटर भारत की ओर आकर देश की इतनी ही भूमि को नेपाल से मिला दिया है। इसके चलते नदी के दूसरी तरफ जा चुके दोनों गांवों के अस्तित्व का संकट भी पैदा हो गया है।
मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई कदम न उठाने से नाराज ग्राम पंचायत सूरतनगर के प्रधान अमूल्य त्रिपाठी ने तीन महीने पहले अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
इस मामले में उन्होंने जून महीने में नदी से बार्डर को बचाने के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका भी दायर की है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित तहसील निघासन की ग्राम पंचायत सूरतनगर से पांच वर्ष पहले मोहाना नदी दस किलोमीटर दूर थी।
इसके बाद नदी में कटान हुआ और यह भारत की भूमि को आगोश में लेती गई लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा, दो साल पहले नदी ने गांव चौगुर्जी और बकटोर्री को नेपाल से मिलाते हुए सूरतनगर, पटेहरी, नई बस्ती, छोटी तिकुनियां और बंघिया गांव का वजूद मिटा दिया।
कटान से चौगुर्जी पुल, यहां बना इंटर कॉलेज समेत कई भवन और कृषि भूमि नदी में समा गए। इन पांचों गांवों के रहने वाले लोग दो साल से खानाबदोश की तरह जी रहे हैं। 40-50 परिवार तिकुनियां-सूरतनगर सड़क मार्ग पर बस गए हैं।
सूरतनगर के एएनएम सेंटर में 20 परिवार अभी भी रह रहे हैं बाकी लोग या तो कहीं दूसरी जगह चले गए हैं या फिर आसपास जमीन खरीद कर बस गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से इन लोगों को कई बार घर और इसके लिए जगह देने के आश्वासन दिए लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।
यही नहीं, नदी अब भी जब-तब कटान कर भारत की भूमि को अपनी चपेट में ले रही है लेकिन अब तक बंधा तो दूर ठोकरों तक के निर्माण की योजना नहीं बन सकी है। दूसरी तरफ नेपाल ने अपने बार्डर पर बंधे का निर्माण करा लिया है।