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मोदी सरकार कसेगी पाकिस्तानी हैकरों की नकेल!

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नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार भारतीय वेबसाइटों पर बढ़ते हमलों के मद्देनजर एक व्यापक साइबर सुरक्षा नीति लागू करना चाहेगी। सरकार चीनी और पाकिस्तानी हैकरों से बचाव के लिए निजी और सार्वजनिक कंपनियों के लिए नए मानक भी तय करेगी।
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नेशनल साइबर सेफ्टी एंड सिक्यूरिटी स्टैंडर्ड्स ने लगातार बढ़ते साइबर हमलों से बचाव और इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक निर्देश तैयार करने का फैसला किया है ताकि निजी और सार्वजनिक कंपनियों के ऑनलाइन डाटा सुरक्षित रहें।

दरअसल सरकार के पास कोई मजबूत साइबर रक्षा प्रणाली और इस बारे में मुकम्मल नीति न होने से ऐसे हमले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार के पास ऐसे हमलों से बचाव के लिए प्रशिक्षित साइबर लड़ाके भी नहीं हैं।
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चीन-पाक‌िस्तान के न‌िशाने पर भारतीय साइट

ऐसे हमलों में ज्यादातर इन वाली वेबसाइटों पर किए जा रहे हैं। पिछले साल जून में हुए हमलों में ऐसी वेबसाइटों की तादाद 80 फीसदी तक पहुंच गई थी। जिन वेबसाइटों पर हमले हुए उनके सर्वर भारत में हैं।

जुलाई, 2013 में 2380 भारतीय साइटें बिगाड़ दी गई थीं। इनमें से 1,511 .इन डोमेन की थीं। नेशनल साइबर सेफ्टी एंड सिक्यूरिटी स्टैंडर्ड्स हैंडबुक के मुताबिक, 2010 के मार्च में किए गए साइबर हमले में रक्षा मंत्रालय से अहम जानकारियां चुरा ली गई थीं।

दरअसल भारत की साइबर जासूसी करने वाले समूह ने भारतीय कंप्यूटरों को काबू करने के लिए ट्विटर, गूगल और दूसरी सोशल नेटवर्किंग सर्विस प्रोवाइडरों का इस्तेमाल किया था।

PMO में भी लग चुका है सेंध

बोटनेट नाम के एक चीनी परजीवी प्रोग्राम ने तो हंगामा मचा दिया था। मार्च, 2010 में तो इसके जरिये पीएमओ तक में सेंध लगा दी गई थी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत को जल्द से जल्द साइबर युद्ध नीति लानी होगी।  

हालांकि समय पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी अन्य नीतियां भी लागू करनी होंगी। लेकिन अब तक भारत 2013 में बनी साइबर सुरक्षा नीति के उद्देश्यों को लागू नहीं कर सका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में साइबर सुरक्षा नीति के तहत न सिर्फ रणनीतिक महत्व के विभागों के कंप्यूटरों के आंकड़ों को सुरक्षित करना होगा बल्कि अहम बुनियादी संरचनाओं को भी हमलों से बचाना होगा।
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चीन, अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा यूजर

दरअसल साइबर स्पेस और इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ने से आतंकवादियों, अपराधियों और दुश्मन देशों की ओर से साइबर हमलों का खतरा बेहद बढ़ गया है। गौरतलब है कि चीन और अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फिक्की में होमलैंड सिक्यूरिटी के सह अध्यक्ष डॉ. विवेक लाल का कहना है कि साइबर हमलों से भारत के बेहद महत्वपूूर्ण बुनियादी आधारों मसलन, बैंकिंग सिस्टम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, बिजली इन्फ्रास्ट्रक्चर और गैस पाइपलाइनों को बचाना बेहद जरूरी है।

दरअसल चीन और पाकिस्तान के साइबर हमलावरों का खतरा देश में लगातार बना हुआ है। पाकिस्तानी हमलावरों का हमला वर्ष, 2000 से ही जारी है। जबकि चीन साइबर स्पेस में भारत का बड़ा दुश्मन बन चुका है।

वर्ष, 2003 से चीनी सेना अब तक 30000 साइबर योद्धाओं को प्रशिक्षित कर चुकी है। जबकि निजी क्षेत्र में डेढ़ लाख हैकर तैयार किए गए हैं।
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