लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी ‘डबल जीत’ के बाद अब बनारसी बाबू बनने की तैयारी कर रहे हैं।
वडोदरा से रिकॉर्ड जीत के बाद भी मोदी वाराणसी सीट ही अपने पास रखेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इसके पुख्ता संकेत दे दिए हैं। माना जा रहा है कि मोदी के गुजरात विकास मॉडल का दूसरा रूप अब समूचे उत्तर प्रदेश और खासतौर पर वाराणसी में भी देखने को मिल सकता है।
विकसित होगा वाराणसी
कयास यह भी लग रहे हैं कि अमूल की तरह अब कई दूसरी कंपनियां भी मोदी के नए ठिकाने वाले राज्य में अपना पांव जमा सकती हैं।
दरअसल पार्टी के अंदर इस तरह की चर्चाएं भी हैं कि बनारस का महत्व देखते हुए मोदी वडोदरा की जगह काशी सीट को अपने पास रख सकते हैं।
सीट के लिहाज से गुजरात के मुकाबले उत्तर प्रदेश की भूमिका केंद्र की सियासत में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी के मद्देनजर मोदी बनारस का रुख कर सकते हैं। तो दूसरी ओर आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के लिए मोदी का ऐसा निर्णय कारगर साबित हो सकता है।
वाराणसी सीट से बढ़ेगा पार्टी का कद
विधानसभा चुनाव में दबदबा बढ़ाने के लिए बाकायदा तैयारी शुरू हो चुकी है। यूपी के प्रभारी के तौर पर अमित शाह इसके लिए मोर्चा संभाल चुके हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि अब से पहले कई प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बना चुके हैं।
जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहरी वाजपेयी इसके बेहतर उदाहरण हैं। दोनों प्रमुख पार्टियों के अध्यक्ष राजनाथ सिंह और सोनिया गांधी भी यूपी के महत्व को समझते हुए यहां जमे हुए हैं।
कहा जा रहा है कि अगर मोदी वाराणसी की जगह वडोदरा में ही बने रहेंगे तो पार्टी में उनके कद के लिहाज से अच्छा संदेश नहीं जाएगा। इसलिए उनके वाराणसी सीट को लेकर आगे बढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही है।