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संघ के विवादित मुद्दों से दूर रहेंगे मोदी

Mon, 19 May 2014 12:30 PM IST
हरीश लखेड़ा, एजेंसी/अमर उजाला, नई दिल्ली, जयपुर
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नरेंद्र मोदी इसी सप्ताह देश की कमान थाम लेंगे। अपने पूर्णकालिक प्रचारक रहे मोदी को पूर्ण बहुमत के साथ साउथ ब्लॉक भेजने के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोशिश रहेगी कि उसके कोर मुद्दों पर नई सरकार गंभीरता से अमल करे। हालांकि माना जा रहा है कि अब संघ के सांस्कृतिक मुद्दों को तो तरजीह मिल सकती है, लेकिन मोदी विवादित मुद्दों से दूर ही रहेंगे।
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संघ के कोर मुद्दों में एक देश एक कानून का मामला प्रथम स्थान पर रहा है। यानी एक समान नागरिक संहिता, कश्मीर से धारा 370 खत्म करना और अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण, लेकिन यह साफ है कि विकास और सुशासन के मुद्दे पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले मोदी अभी इन विवादित मुद्दों को किसी भी हालत में नहीं छुएंगे।

वैसे संघ भी इन मुद्दों से पहले निर्मल व अविरल गंगा और गायों का संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ ही धर्मांतरण पर लगाम कसना चाहेगा। संघ धर्मांतरण खासतौर पर आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे धर्म परिवर्तन के सख्त खिलाफ रहा है। गुजरात समेत भाजपा शासित कई प्रदेश पहले ही धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बना चुके हैं। इसलिए अब धर्मांतरण के लिए विदेशों से आ रहे पैसे पर निगरानी हो सकती है।
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हिंदू आतंकवाद के आरोप से मुक्ति तलाशेगा संघ

इसके साथ ही संघ की कोशिश रहेगी कि उसे हिंदू आतंकवाद फैलाने के आरोप से मुक्ति मिल जाए। संघ का आरोप रहा है कि यूपीए सरकार खासतौर पर गृह मंत्रालय की कमान पी. चिदंबरम के हाथ आने के बाद हिंदू आतंकवाद का मामला उछाला गया।

यूपीए सरकार हिंदू आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है। संघ इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश मानता है। इसलिए संघ ने गुजरात में अपने काम का लोहा गिना चुके आक्रामक छवि के मोदी को आगे किया और फिर अपनी पूरी ताकत झोंक दी। पूरा संघ परिवार मोदी के पीछे खड़ा हो गया।

दरअसल, यह पहला मौका है जब संघ का पूर्णकालिक प्रचारक प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। वैसे तो अटल बिहारी वाजपेयी भी संघ के प्रचारक थे, लेकिन वे गठबंधन के सहारे साउथ ब्लॉक पहुंचे थे। वर्ष 1925 में विजयादशमी के मौके पर स्थापित संघ ने आखिरकार 89 वर्षों में अपने प्रचारक को अपने दम पर देश की कमान सौंपने में कामयाबी पा ली है।

'मोदी के कामकाज में दखल नहीं देगा संघ'

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के गठन की कवायद के बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने साफ किया है कि वह नई सरकार के गठन, उसके कामकाज में कोई दखल नहीं देगा और न ही वह भाजपा का रिमोट कंट्रोल है। हालांकि संघ ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह अपने सुझाव जरूर देगा।

वहीं दूसरी ओर भाजपा का भी कहना है कि मोदी सरकार के गठन में संघ की कोई भूमिका नहीं है। भावी पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई भाजपा नेताओं ने चुनाव परिणाम के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत और अन्य नेताओं से मुलाकात की है।

जयपुर में संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि संघ ने लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद न तो भाजपा और न ही मोदी को कोई दिशानिर्देश दिया है। राजनीति और सरकार में संघ की कभी कोई भूमिका नहीं रही है।
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'उम्मीदवार संघ की विचारधारा को खुद आगे बढ़ाएंगे'

माधव ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जीते उम्मीदवार संघ की विचारधारा से अवगत हैं और उन्हें पता है कि कैसे काम करना है और अपनी विचारधारा को कैसे आगे बढ़ाना है। सरकार के कामकाज, मंत्रिमंडल चयन और राजनीति में संघ के दखल देने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर संघ अपने सुझाव जरूर देगा।

उन्होंने कहा कि संघ का काम लोगों को देश की समस्याओं और ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए प्रेरित करने का था जोकि खत्म हो चुका है। संघ अब अपने देश सेवा, समाज, चरित्र और व्यक्तिगत निर्माण के मूलभूत कार्यों पर लौटेगा।

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने भी सरकार के गठन में संघ की किसी तरह की भूमिका को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का गठन पार्टी नेतृत्व के साथ विचार विमर्श के बाद होगा। साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं के संघ के नेताओं से मुलाकात को भी कोई खास तवज्जो नहीं दी। सरकार गठन में संघ की भूमिका पर उन्होंने कहा कि संघ कभी भी ऐसे मामलों में दखल नहीं देता है। नायडू ने यह बात संघ के महासचिव और दूसरे नंबर के नेता भैयाजी जोशी से मुलाकात के बाद कही।
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