भाजपा की चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर जल्द ही अंतिम मुहर लग सकती है।
पार्टी को चुनावी महासमर के लिए कुछ हद तक एकजुट करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब भाजपा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का विवाद सुलझा लेना चाहता है।
इसके लिए संघ व भाजपा नेतृत्व आगामी आठ और नौ सितंबर को दिल्ली में मंथन करेगा। इस दो दिनी बैठक में संघ परिवार आगामी चुनावों को लेकर रणनीति भी बनाएगा।
इस बैठक में माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने को लेकर अंतिम राय बन जाने की संभावना है। हालांकि भाजपा इस मुद्दे पर अब भी बंटी है।
आडवाणी, सुषमा अब भी खिलाफ
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह व राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली तो मोदी के नाम के ऐलान में देर करने के पक्ष में नहीं है। जबकि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज अब भी ऐसा करने के सख्त खिलाफ हैं।
खुद को उम्मीदवार मानती हैं सुषमा
सूत्रों के अनुसार सुषमा तो यहां तक कह चुकी है कि यदि मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता है तो उनके लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। सुषमा विपक्ष के नेता के तौर पर खुद को पीएम पद का स्वाभाविक उम्मीदवार मानती हैं।
84 कोसी यात्रा विफल होने से संघ परिवार चिंतित
बहरहाल, इस दो दिनी बैठक में संघ के वरिष्ठ नेताओं का भाजपा व सहयोगी संगठनों के नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है। क्योंकि विश्व हिंदू परिषद की पहल पर आयोजित उत्तर प्रदेश की 84 कोसी यात्रा के विफल हो जाने से संघ परिवार चिंतित है। संघ और भाजपा की समन्वय बैठक पिछले दिनों भी दिल्ली में हुई थी।
भाजपा की गोवा कार्यकारिणी की बैठक में उपजे विवाद के बाद से संघ की कोशिश रही है कि पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव के लिए एकजुट हो जाएं। भाजपा ही नहीं बल्कि विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत पूरा संघ परिवार भी एकजुट दिखे। इस कोशिश कुछ कामयाब दिखी है। अब संघ पीएम पद के विवाद को सुलझा लेना चाहता है।