2014 के आम चुनावों के आंकड़ों ने लोगों को चौंका दिया है। जिस तरह से बीजेपी ने अकेले दम पर इस बार पूर्ण बहुमत हासिल किया है। इससे साफ होता है ये सीधे तौर पर मोदी की लहर ने संभव किया है। देश के लगभग हर हिस्से में मोदी के प्रचार का असर नजर आया।
बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार का असर केवल उत्तर भारत में ही नहीं बल्कि देश के उन इलाकों में दिखाई दिया जहां पार्टी की हालत कमजोर मानी जा रही थी।
इन सीटों में केंद्रशासित प्रदेश भी शामिल हैं। जहां बीजेपी काफी मजबूत बनकर उभरी। पार्टी ने इन इलाकों में शानदार जीत हासिल की।
केंद्र-शासित प्रदेशों का हाल
भले ही इन इलाकों में लोकसभा की एक-एक ही सीटें थी लेकिन बीजेपी ने वहां भी अपना परचम लहराया। इनमें दादर नगर हवेली, दमन दीव और अंडमान निकोबार की सीटें शामिल हैं। जहां बीजेपी उम्मीदवार ने अपने विरोधियों को करारी शिकस्त दी।
दादर नगर हवेली में बीजेपी उम्मीदवार नाथु भाई गोमन भाई पटेल ने 6 हजार से ज्यादा मतों से जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के मोहन भाई सांजी भाई डेल्कर को मात दी।
बता दें कि ये सीट पहले भी बीजेपी के ही पास थी। 2009 में भी इस सीट पर नाथु भाई गोमन भाई पटेल ही जीते थे।
बीजेपी उम्मीदवारों का कमाल
दमन और दीव की बात करें तो यहां भी बीजेपी को शानदार जीत मिली है। बीजेपी उम्मीदवार लालू भाई बाबू भाई पटेल ने कांग्रेस के उम्मीदवार केतन पटेल को 9 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी।
ऐसा ही हाल अंडमान निकोबार में भी देखने को मिला। जहां भारतीय जनता पार्टी के विष्णुपद राय ने सात हजार से ज्यादा मतों से शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के कुल्दीप राय शर्मा को हराया।
कांग्रेस की मुश्किल
जहां एक ओर बीजेपी का प्रदर्शन इन चुनावों में शानदार रहा। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए ये चुनाव बुरे सपने से कम नहीं था।
इसका पता इसी से चल जाता है कि यूपीए-2 सरकार में मंत्री रहे वी. नारायणसामी अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे नजर आए। उन्हें ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के आर. राधाकृष्णन से कड़ी टक्कर मिली।
लक्षद्वीप में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पी. पी. मोहम्मद फैसल ने पंद्रह सौ से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के हमदुल्ला सईद को हराया।
फिलहाल इन इलाकों से आए परिणाम में कितना असर मोदी लहर का है ये तो कह पाना थोड़ा मुश्किल होगा। लेकिन एक बात तो तय है कि देश की जनता इस बार बदलाव चाहती थी।