भाजपा के प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार माने जा रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकर्ताओं की ही नहीं, बल्कि ज्यादातर वरिष्ठ नेताओं की भी पसंद बनते जा रहे हैं।
पार्टी की चुनाव अभियान समिति की कमान को लेकर छिड़ी अंदरूनी सियासी जंग में मोदी समर्थक अब लालकृष्ण आडवाणी खेमे पर बढ़त बनाते दिख रहे हैं।
इसके बावजूद आडवाणी खेमा अभियान समिति की कमान मोदी के हवाले होने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।
दूसरी ओर मोदी समर्थक भी इस बार आडवाणी की ‘जिद’ के सामने झुकने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। इससे पार्टी के गोवा सम्मेलन के मोदी समर्थक और विरोधियों की सियासी जंग का अखाड़ा बनने की जमीन तैयार हो गई है।
खास बात यह है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने विनम्रता के साथ खुद को इस विवाद से अलग कर लिया है लेकिन पार्टी के ज्यादातर नेता मोदी के पक्ष अथवा विरोध को लेकर दो गुटों में बंटते दिख रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार मोदी को रोकने की मुहिम में जुटे आडवाणी के साथ लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, अनंत कुमार ही दिख रहे हैं।
मोदी के विरोध के चलते पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी भी आडवाणी के साथ हैं। यह अलग बात है कि आडवाणी ने ही भाजपा अध्यक्ष के तौर पर गडकरी की दूसरी बार ताजपोशी की राह में कांटे बिछाए थे।
आडवाणी ने मोदी को रोकने के लिए गडकरी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने का सुझाव दिया था, लेकिन राजनाथ ने मानने से मना कर दिया।
बाद में गडकरी ने भी इंकार कर दिया। पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू की स्थिति साफ नहीं है।
दूसरी ओर मोदी के समर्थन में राजनाथ के साथ ही अरुण जेटली, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी, बलबीर पुंज समेत ज्यादातर वरिष्ठ नेता हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को लेकर स्थिति साफ नहीं है लेकिन रमन सिंह और मनोहर पार्रिकर भी मोदी के पक्ष में हैं।
उमा भारती अभी आडवाणी के साथ हैं लेकिन कल्याण सिंह मोदी के पक्ष में पहले ही बयान दे रहे हैं।
यह विभाजन तेज होता जा रहा है। मोदी के समर्थन और विरोध की इस सियासी जंग में कार्यकर्ताओं का दबाव भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।