न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कपड़े की एक पेंटिंग पर
हस्ताक्षर करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल सोशल मीडिया पर यह खबर
फैल गई कि पीएम ने शेफ विकास खन्ना के लिए राष्ट्रीय ध्वज पर आटोग्राफ दिया
है।
खन्ना इस ध्वज को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेंट करेंगे।
विवाद बढ़ा और कांग्रेस की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया आई और तिरंगे का
अपमान बताया गया। इसके बाद सरकार को सफाई देनी पड़ी कि मोदी ने जिस कपड़े
पर आटोग्राफ दिया, वह तिरंगा नहीं है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के
महानिदेशक फ्रैंक नोरोन्हा ने बताया कि पीएम ने जिस कपड़े पर हस्ताक्षर
किए, उस पर न तो सफेद रंग था और न ही चक्र।
एक नि:शक्त बच्ची ने अपने पैरों
के अंगूठे से कपड़े पर कारीगरी की थी। जब वह खन्ना के साथ पीएम से मिलने
के लिए आई तो मोदी ने कपड़े पर हस्ताक्षर कर दिए।
इसके पहले खबर आई थी
कि डिनर का मेन्यू तैयार करने वाले शेफ खन्ना से खुश होकर पीएम ने उनके लिए
एक तिरंगे पर हस्ताक्षर कर दिया था। खन्ना ने यह कथित तिरंगा मीडिया को भी
दिखाया था। फ्लैग कोड के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ नहीं लिखा जा सकता
है। इसलिए विवाद शुरू हो गया।
यह भी खबर आई कि भारतीय विदेश विभाग के
अधिकारियों ने खन्ना से यह देखने के लिए वह कथित तिरंगा वापस ले लिया कि
कहीं फ्लैग कोड का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। हालांकि सरकार ने इस बात को भी
गलत बताया है।
पीएम द्वारा तिरंगे पर ऑटोग्राफ की खबर आते ही कांग्रेस
हमलावर हो गई। कांग्रेस ने कहा है कि आप चाहें जितने ऊंचे पद पर हों,
राष्ट्रीय ध्वज हमेशा आपसे ऊपर होता है और आपको यह बात समझनी चाहिए। जब
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला से पूछा गया कि क्या पीएम ने
तिरंगे पर हस्ताक्षर कर आईपीसी के तहत अपराध किया है तो उन्होंने कहा कि हम
भाजपा की तरह संकीर्ण नहीं हैं। हम प्रधानमंत्री के पद का सम्मान करते
हैं।
उन्हें इस मामले को देखना चाहिए और सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। वहीं
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर मोदी से सवाल किया है कि क्या
उन्होंने नियम पढ़े हैं।