भाजपा नेता और केन्द्र सरकार में मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा है पूरे देश में गाय का मांस बैन करने की कोई भी भी मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई भी फैसला राज्य सरकारें लेती है तो वे स्थानीय भावनाओं के आधार पर लिए जाते हैं1।
रायपुर में प्रेस वार्ता के दौरान नायडू ने कहा कि भाजपा का गृह राज्य मंत्री किरण रीजिजू के बयान से कोई लेना देना नहीं है। नायडू ने ये भी कहा कि देश में गाय के मांस पर बैन लगाने की कोई योजना नहीं है, ये फैसला राज्य सरकारों द्वारा लिया जाना है।
प्रेस कांफ्रेस के दौरान नायडू ने कहा कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष को प्रधानमंत्री मोदी को कुछ भी कहने से पहले होम वर्क कर के आना चाहिए। बताते चलें कि इससे पहले मोदी सरकार के ही मंत्री बीफ के मुद्दे पर लड़ते रहे हैं।
आपस में ही भिड़ रहे हैं सरकार के मंत्री
कुछ दिन पहले अल्पसंख्यक राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि जिन्हें गोमांस खाना है, वे पाकिस्तान चले जाएं। उसी के अगले दिन गृहराज्य मंत्री किरण रिजीजू ने कहा था कि भारत लोकतांत्रिक देश है और कई बार ऐसे बयान दिए जाते हैं, जो स्वीकार्य नहीं होते
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा था कि 'मैं बीफ खाता हूं, अरुणांचल प्रदेश से हूं। क्या कोई मुझे रोक सकता है?' उन्होंने कहा था कि खाने पीने के मामलों में ज्यादा भावनात्मक होने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने ये भी कहा था, 'कि जो राज्य हिंदू बहुल
राज्य हैं, वे ऐसे कानून बनाएं जो हिंदू मान्यताओं के अनूरूप हैं।
उन्हें ऐसा करने दीजिए। लेकिन सब पर ऐसा कोई दबाव नहीं होना चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष के अलग हैं सुर
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पणजी में कहा कि जहां कहीं भी भाजपा की सरकार है वहां गाय के मांस पर बैन लगेगा। मुख्तार के बयान को उन्होंने कहा कि ये उनका निजी बयान था।
जिस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं, मैं कोई निजी राय नहीं दे सकता। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि पूरे देश में गाय के मांस पर बैन लगाया जाएगा और कत्लखाने बंद कराए जाएंगे।
गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ ने रिजिजू के बयान के बाद कहा था कि गोमांस का मुद्दा बहुसंख्यक वर्ग की आस्था से जुड़ा हुआ है। सभी की जनभावनाओं का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
इस मुद्दे पर जनभावनाओं के विरुद्घ बयान नहीं देना चाहिए।