मायावती ने भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को लोगों को बांटने वाला नेता करार दिया है और कहा है अगर वह केंद्र में सरकार बनाते हैं तो देश को सांप्रदायिक दंगों का सामना करना पड़ सकता है।
बक्सर में बीएसपी उम्मीदवार ददन यादव के लिए चुनाव प्रचार करने आईं बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि मोदी सीधे तौर पर विभाजनकारी नेता हैं।
वह 2002 के गुजरात दंगों के जिम्मेदार हैं। अगर वह केंद्र में आए तो देश में सांप्रदायिक दंगों और तनाव का माहौल बन सकता है।
'दंगों के लिए ठहराया जिम्मेदार
इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में मायावती ने अपना चुनावी कैंपने शुरू करने के मौके पर कहा कि अगर मोदी चाहते तो वे दंगे रूकवा सकते थे। उन्होंने मोदी पर दंगों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
बसपा सुप्रीमो ने मोदी पर चुटकी लेते हुए कहा कि वे बार-बार कहते रहते हैं कि जब वे सत्ता में आएंगे, तो देश बदलकर रख देंगे, लेकिन जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तो उन्होंने कोई बदलाव क्यों नहीं किया?
नासिक की इस सभा में मायावती ने लोगों से गुजारिश कि की वे भाजपा के मेनिफेस्टो के चक्कर में न आएं।
कांग्रेस पर भी वार
नासिक की रैली में मायावती ने कहा कि देश्ा की स्थिति आज बद्तर है। देश में भ्रष्टाचार और आतंकवाद काफी बढ़ गया है। उन्होंने इन सबके लिए भाजपा और कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ''बीजेपी भी कांग्रेस के साथ देश में अव्यवस्था बढ़ाने के लिए बराबर की जिम्मेदार है।
उन्होंने दोनों शीर्ष पार्टियों पर आरोप लगाते हुए कहा, '' कांग्रेस पार्टी कई सालों से देश पर राज कर रही है, तो वहीं बीजेपी ने भी छह साल तक देश पर राज किया और इस दौरान इन्होंने सिर्फ ऐसी पॉलीसिज निकालीं, जो बड़े-बड़े व्यापारियों के हित के लिए निकालीं गईं। आम आदमी को हमेशा नकारा गया है।''
उन्होंने लोगों से बसपा को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि वे कॉरपोरेट दबाव में सरकार को बरबाद नहीं करेंगी। उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सत्ता के दौरान, यूपी में सभी को समान दर्जा प्राप्त था और न ही कोई सांप्रदायकि दंगे थे।
बसपा की सभी सीटें दांव पर
मायावती ने मीडिया पर भी भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मीडिया सिर्फ दो, कांग्रेस और भाजपा, पर ही ध्यान देती है और उन्हें ही देश में महत्वूपर्ण बताती है।
बहुजन समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में अपनी पूरी 48 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है। हालांकि इतिहास मायावती के पक्ष में नहीं है।
पिछले लोकसभा चुनावों में पार्टी को एक सीट पर भी जीत हासिल नहीं हुई थी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार बसपा के लिए कोई चमत्कार हो पाएगा।