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मोदी के जयापुर गांव का छुपा हुआ सच, आप भी जानिए

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गांव जयापुर का एक बड़ा वर्ग गांव में हो रहे बदलाव से खुश नहीं है। उन्हें लगता है कि एलईडी बल्ब मिल जाने, सोलर लाइट लग जाने और टॉयलेट बन जाने से उनकी जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला।
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उन्हें रोजगार चाहिए। वहीं जयापुर से सटे गांवों में अब यह सोच घर करती जा रही है कि जयापुर उस दिन आदर्श गांव कहलाएगा जब उसके आसपास के गांव भी उसकी तरह ही विकसित और खुशहाल होंगे।

गांव की दलित बस्ती के अनिल इंटरमीडिएट के छात्र हैं। विज्ञान के इस छात्र ने कहा कि जब मोदी जी ने इस गांव को गोद लिया तो हम सबको उम्मीद थी कि गांव में कल-कारखाने लगेंगे, ढेर सारे लोगों को रोजगार मिलेगा।
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टायलेट पार्क से नहीं दूर होगी हमारी गरीबी

हमारी गरीबी दूर होगी और गांव खुशहाल होगा, मगर अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। हां, सड़क बनने लगी। सोलर लाइट लग गई। टॉयलेट बन गए। मगर यहां के बेरोजगारों को काम नहीं मिला, जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

गांव में पान की गुमटी लगाने वाले मुन्नालाल कहते हैं, हमें खैरात नहीं रोजगार चाहिए। गांव की सूरत हम खुद बदल देंगे। मुन्ना कहते हैं, गांव को एक कम्युनिटी सेंटर की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके बनने से गांव में शादी-विवाह के दौरान आने वाली दिक्कतें दूर होंगी।

गांव की प्रधान दुर्गावती देवी इन बातों से इत्तेफाक रखती हैं। वे कहती हैं, जब कभी मोदी जी से बात होगी मैं गांव में उद्योग लगाने की मांग उनसे जरूर करूंगी। एक कारखाना लगेगा तो सैकड़ों लोगों को नौकरी मिलेगी और इससे मौजूदा पीढ़ी ही नहीं, आने वाली पीढ़ी का भी भविष्य संवर जाएगा।

पड़ोस के गांव की नहीं बदली तस्वीर

मोदी की वजह से जयापुर के तो अच्छे दिन आ गए मगर उससे सटे गांव कचहरियां, हरनामपुर आदि की तस्वीर बिलकुल नहीं बदली। आज भी गांव के लोग बिजली, पानी, सड़क और गंदगी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। निजी नलकूपों से खेतों की सिंचाई हो रही। लो वोल्टेज तो यहां की आम समस्या है।

चार हजार की आबादी पर बिजली का एक ट्रांसफार्मर है वह भी ज्यादातर खराब ही रहता है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिवदास पटेल कहते हैं कि एक जमाना था जब आराजीलाइन ब्लाक में हमारा गांव कचहरियां सबसे संपन्न गांव था मगर सरकारी उदासीनता के चलते हम विकास की दौड़ में पीछे छूट गए।
 
गांव के ही बृजेश सिंह कहते हैं, कृषि से स्नातक होने के बाद भी बेरोजगार हूं। खेती करना मजबूरी है। उसमें भी दिक्कत यह है कि हमें हमारी उपज की सही कीमत नहीं मिल रही। बिचौलिए मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

वहीं उनके साथी राजेश कुमार और राकेश पटेल कहते हैं कि गांव में कौशल विकास केंद्र खुलने चाहिए ताकि यहां की युवा पीढ़ी भी हुनरमंद होकर खुद का रोजगार कर सके।
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जयापुर के विकास का कोई ब्लूप्रिंट नहीं

आने वाले दिनों में जयापुर में क्या कुछ नया होगा, यह बताने वाला कोई नहीं। न तो ग्राम प्रधान को पता है कि जयापुर को मोदी जी उपहार में क्या देने वाले हैं और न ही पीएम के संसदीय दफ्तर में बैठे लोगों को ही इस बाबत कोई जानकारी है।

पीएम मोदी की वेबसाइट पर भी इस बात का जिक्र नहीं है कि आने वाले पांच साल में जयापुर की सूरत क्या होगी? सड़क, बिजली, पानी और सफाई के साथ ही यहां क्या कुछ नया होगा या जयापुर के विकास का खाका तैयार किया गया है, किसी को कुछ पता नहीं।

नौसारी (गुजरात) के भाजपा सांसद सीआर पाटिल को मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों की निगरानी का काम सौंपा है। पाटिल जयापुर आते हैं। लोगों से मिलते भी हैं मगर उन्होंने भी अभी तक गांव के लोगों को यह नहीं बताया कि आने वाले दिनों में गांव में क्या नया होने वाला है।
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