केंद्र की नई मोदी सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार को लेकर संघ और भाजपा के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट बढ़ गई है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून के बाद कभी भी अपनी कैबिनेट के विस्तार को अमलीजामा पहना सकते हैं।
संघ-भाजपा से मिल रहे संकेतों के अनुसार कैबिनेट के इस विस्तार में करीब दो दर्जन नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। वहीं प्रधानमंत्री के भूटान यात्रा से लौटने के बाद करीब आधा दर्जन राज्यों के राज्यपालों का बदला जाना भी करीब-करीब तय माना जा रहा है।
भाजपा-संघ सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार के इस विस्तार में उन राज्यों को तवज्जो दी जाएगी जिन्हें पहली मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई है। इसमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ के कुछ चेहरों को जगह मिलनी तय बताई जा रही है।
गोपीनाथ मुंडे के बाद किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
गोपीनाथ मुंडे की दुखद मौत के बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को देखते हुए एक पिछड़े चेहरे को कैबिनेट में शामिल करने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा रहा है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को भी मोदी कैबिनेट के विस्तार में जगह मिलना तय माना जा रहा है।
लोकसभा चुनाव में इन दोनों प्रदेशों की सभी सीटें भाजपा की झोली में आई हैं। इसके अलावा केंद्रीय राजनीति में पार्टी के कुछ चर्चित चेहरों मुरली मनोहर जोशी, राजीव प्रताप रूडी, एसएस अहलूवालिया, मुख्तार अब्बास नकवी आदि के कैबिनेट में आने की चर्चाएं हैं।
वहीं अरुण शौरी और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर के बारे में कहा जा रहा है कि यदि संघ की हरी झंडी मिली तो ये दोनों पीएम मोदी की पसंद के रूप में सरकार में शामिल किए जा सकते हैं। भाजपा की जीत को दमदार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश के साथ बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ और चेहरों को भी सियासी सामाजिक संतुलन साधने के लिहाज से सरकार में जगह दी जा सकती है।
मोदी सरकार में कौन बनेगा मंत्री?
भाजपा को लोकसभा में बेशक अपने बूते बहुमत हासिल है मगर उसने एनडीए के घटक दलों को साथ लेकर चलने का वादा किया है। इस लिहाज से माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल और महाराष्ट्र में उसके घटक साथी आरपीआई नेता रामदास अठावले को राज्यमंत्री के रूप में सरकार में शामिल किया जा सकता है।
वहीं नगालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नगालैंड पीपुल्स फ्रंट के नेता नेफेरियो रियो को भी कैबिनेट में शामिल करने का नैतिक दबाव है क्योंकि वे मुख्यमंत्री पद छोड़कर संसद पहुंचे हैं और एनडीए के चुनाव पूर्व सहयोगी हैं।
सूत्रों का कहना है कि संघ भी मोदी के इस रुख से पूरी तरह सहमत है कि बहुमत के बावजूद दूरगामी राजनीति के लिहाज से एनडीए घटकों को साथ लेकर चलने की जरूरत है। वहीं भाजपा के पुराने दिग्गजों को राजनिवास में भेजने का खाका भी लगभग बन चुका है।
प्रधानमंत्री का भूटान दौरा
प्रधानमंत्री 16 जून को भूटान की अपनी दो दिन की पहली विदेश यात्रा से लौटेंगे। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार से पहले प्रधानमंत्री यूपीए सरकार में नियुक्त करीब आधा दर्जन राज्यपालों की जगह नए राज्यपालों की नियुक्ति को अमलीजामा पहना देंगे।
उत्तर प्रदेश के दो पुराने दिग्गजों कल्याण सिंह और लालजी टंडन के अलावा दिल्ली से विजय कुमार मल्होत्रा सरीखे नेताओं को राज्यपालों की संभावित सूची में गिना जा रहा है।