प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को पांच दिन की हाई प्रोफाइल यात्रा के लिए अमेरिका रवाना होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति से द्विपक्षीय वार्ता के अलावा मोदी शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की महासभा को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा कई अधिकारियों, बिजनेसमैन और आम लोगों से भी उनकी मुलाकात का कार्यक्रम है।
यात्रा के सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा कर रहे भारत ने कहा, "हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली अमेरिका यात्रा को भारत के द्विपक्षीय संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देख रहे हैं। हम चाहते हैं कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हों और हम मिलकर ऐसे क्षेत्र तलाश सकेंगे, जहां एक-दूसरे की मदद करेंगे।"
ओबामा समेत कई बैठकों में होंगे शामिल
नरेंद्र मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, नेपाल के पीएम सुशील कोइराला और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
हालांकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। भारत ने अमेरिका को प्रधानमंत्री के नवरात्र के व्रत की भी जानकारी दे दी है।
मोदी अमेरिकी कॉरपोरेट जगत के 15 से ज्यादा दिग्गजों से मुलाकात करेंगे, जिसमें गूगल, बोइंग और जीई (जनरल इलेक्ट्रिक) शामिल हैं। भारत की कोशिशें ज्यादा से ज्यादा निवेश भारत लाने की है।
इसके अलावा न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री छह अन्य शीर्ष उद्योगपतियों से अलग से मुलाकात करेंगे। मोदी की व्यस्त यात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 100 घंटे के अपने कार्यक्रम में 50 से ज्यादा इवेंट में भाग लेंगे।
स्मार्ट सिटी के सपने को पूरा करने के लिए मोदी न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग के अनुभवों को सुनेंगे।
अमेरिका से रिश्ते क्यों हैं अहम?
आम चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने के बाद विश्वास से भरे नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा एनडीए सरकार के आने वाले पांच सालों की दशा और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भले ही अमेरिका कई मुद्दों से जूझ रहा हो लेकिन आज भी वह सुपर पावर बना हुआ है। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाओं पर अपनी पकड़ रखता है और अगर भारत अमेरिका से अपने रिश्ते मजबूत बनाता है तो इसका फायदा उसे वैश्विक स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखने में होगा।
मोदी की अमेरिका यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के रूप में देख जा रहा है। लेकिन इस साल यूएस इंडिया सीईओ फोरम की सालाना बैठक आयोजित नहीं की जा रही है जो कि अमूमन प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान बुलाई जाती है।
2005 में इस फोरम की शुरुआत हुई थी लेकिन इस बार मोदी सरकार इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिख रही है। ऐसा लगता है कि मोदी कॉरपोरेट दिग्गजों की जगह खुद अमेरिका के कॉरपोरेट जगत से निवेश के लिए सीधे बात करना चाहते हैं।
दौरे पर चीन की भी होगी नजर
मोदी की अमेरिका यात्रा पर चीन की भी पैनी नजर रहेगी। चीन और अमेरिका दोनो भारत को एक बड़े बाजार के रूप में देख रहे हैं।
सीमा विवाद के बीच चीनी राष्ट्रपति का जिस तरह से भारत में स्वागत किया गया उससे लगता है कि मोदी चीन और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बनाकर चलना चाहते हैं। हालांकि यूपीए सरकार ने चीन के साथ रिश्तो के उलझने के संभावना के चलते अमेरिका के साथ संबंधों में सतर्कता बरती थी।
इनसे भी होगी मुलाकात
अमेरिका की हाई प्रोफाइल यात्रा पर मोदी संयुक्त राष्ट्र की बैठक से इतर श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला, और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।