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अब पाक भी जपने लगा मोदी मंत्र

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पाकिस्तान में जहां भी मोदी की चर्चा होती है उसमें बड़ी अजीबोगरीब बातें निकल कर सामने आती हैं। देश में सबसे ज्यादा नकारात्मक छवि उन्हीं की है। आम धारणा है कि मोदी बहुत ही विवादास्पद और मुस्लिम विरोधी नेता हैं। गुजरात दंगों में मुसलमानों की हत्या के लिए उनको दोषी भी माना जाता है। लेकिन साथ ही यह भी तर्क दिए जाते हैं कि उनके सत्ता में आने पर भारत-पाक रिश्तों में अच्छी प्रगति होगी।
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पाक सरकार इस विषय पर बहुत ही स्पष्ट दिखाई देती है। उसका कहना है कि भारत में चाहे मोदी प्रधानमंत्री बने या कोई और, भारत सरकार को ही फैसला करना होगा कि वह इस्लामाबाद के साथ कैसे संबंध चाहती है। पाक सकारात्मक रूप से उसका जवाब देने के लिए हमेशा तैयार है।

स्थानीय मीडिया में आज कल आतंकवाद, उससे जुड़े विषयों और सरकार की तालिबान से बातचीत पर गंभीर चर्चा की जा रही है और भारत में चुनावी गतिविधियां फिलहाल जगह नहीं पा रही हैं। कभी भारत से खबर आती है तो उसमें मोदी पहले नंबर पर होते हैं।
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क्या कहते हैं जानकार

उसमान काजी पिछले कई सालों से विकास के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और दक्षिण एशिया के मामलों पर गहरी नजर रखते हैं, साथ ही हिंदी व बांग्ला के भी अच्छे जानकार हैं।

उनके मुताबिक पाक एस्टेबलिशमेंट (फौज और सरकार) और मीडिया भारत में राइट विंग के दलों की सरकार के बारे में और पाकिस्तान पर उसके प्रभाव को लेकर बड़ा डरावना दृश्य पेश करती है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से भारत-पाक के बीच बेहतर संबंध नई दिल्ली में राइट विंग दलों की सरकार में हुए हैं जैसा कि वाजपेयी और देसाई सरकार में हुए।

उनकी नजर में भाजपा की मुस्लिम विरोधी राजनीति मुख्य रूप से उसका आंतरिक मामला है और लोकतांत्रिक देश धर्म या अपनी विचारधारा की बुनियाद पर विदेश नीति नहीं चला सकते हैं।

'भारतीय मुस्लिम भूल गए तो हम परेशान क्यों'

वरिष्ठ पत्रकार अशरफ खान समझते हैं कि भारतीयों ने अगर मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना तो वह पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता बेहतर ढंग से कर सकते हैं और भारत में जब भी राइट विंग दलों की सरकार आई है तो पाक के साथ मुश्किल मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है क्योंकि वह बड़े फैसले लेने से कभी भी घबराते नहीं हैं।

उनके मुताबिक अब तो भारतीय मुसलमान भी मोदी का समर्थन कर रहे हैं और अगर वह गुजरात नरसंहार को भूल सकते हैं तो हम क्यों परेशान होते हैं? वर्ष 1998 में जब दोनों देशों में परमाणु परीक्षण किए थे तब भारत में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और पाक में नवाज शरीफ की।

उस समय दोनों देशों के संबंध काफी खराब चल रहे थे और परमाणु परीक्षण ने इसमें ज्यादा तल्‍खी पैदा कर दी। लेकिन एक साल के भीतर ही दोनों देशों के नेतृत्व की लगातार कोशिशों से संबंध बेहतर होने की उम्मीद जगी और उसी दौरान वाजपेयी ने एक कठिन फैसला लिया और बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ खुद बस द्वारा लाहौर गए।

दूसरी तरफ वाघा सीमा पर शरीफ ने उनका भव्य स्वागत किया। इससे आम लोगों को एक दूसरे के देश जाने में आसानी हुई। आज तक लोग वाजपेयी की इज्जत करते हैं और संबंधों को बेहतर करने का पूरा श्रेय उन्हें और नवाज को देते हैं।

अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

कुछ तत्वों को दोनों पड़ोसी देशों के बेहतर संबंध ठीक नहीं लगे और करीब एक साल बाद कश्मीर के मुकाम कारगिल पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच युद्ध छिड़ गया और शरीफ व वाजपेयी के तमाम प्रयासों को मिट्टी में मिला दिया गया।

उस समय जनरल मुशर्रफ पाक सेना प्रमुख थे और शरीफ सरकार इसके लिए उनको ही दोषी मानती है। भारत-पाक संबंधों को लेकर ऐतिहासिक फैसले भाजपा के दौर में लिए गए इसलिए पाक में इसी मुद्दे पर उनकी छवि बेहतर है और लोग वाजपेयी और उनके साथियों को बेहतर लफ्जों में याद करते हैं।

जाने-माने विश्लेषक अरशद मेहमूद कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि मोदी के पीएम बनने से पाक पर कोई बुरा प्रभाव पड़ेगा। उनके मुताबिक मोदी भारत के ‘बिजनेस क्लास’ का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी कोशिश होगी कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध बेहतर हो और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

वह कहते हैं कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन लोगों का संबंध राइट विंग दलों से है लेकिन यह लोग ‘आउट ऑफ दि बॉक्स’ जाने का साहस रखते हैं और कठिन फैसले करते में हिचकिचाते नहीं हैं। वह कहते हैं कि पाक की सोच और विदेश नीति में यह सबसे बड़ी खराबी है और वह चाहते हैं कि अफगानिस्तान में हमारी मर्जी की सरकार बने और भारत में भी, यह तो दुश्मनी बढ़ाने वाली बात है।
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लश्कर और जमात कर रहे मोदी विरोध

जानकारों के मुताबिक पाक में मोदी का कड़ा विरोध करने वालों में भारत की ओर से मुंबई हमलों के लिए दोषी ठहराए जाने वाले हाफिज सईद की पार्टी जमात-उल-दावा और लश्कर-ए-ताइबा जैसे गुट हैं।

वह मानते हैं कि मोदी गुजरात में मुसलमानों के कातिल हैं और उनके सत्ता में आने से कश्मीर में हालात और खराब होंगे और अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाए जाएंगे।
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