यूं तो हर बुधवार को गुजरात कैबिनेट की बैठक होनी चाहिए, लेकिन पिछले तीन हफ्ते में इस बार ऐसा पहला मौका आया, जब यह मुमकिन हो सका।
ऐसा इसलिए, क्योंकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार करने के चक्कर में पिछले एक महीने में ज्यादातर वक्त गुजरात से दूर रहे हैं।
अहम कानून ऐलान के इंतजार में
इंडियन एक्सप्रेस की खबरों के मुताबिक मोदी की गैर-मौजूदगी का असर अकेले कैबिनेट बैठकों पर ही नहीं हुआ है। गुजरात के अहम कानून भी ऐलान का इंतजार कर रहे हैं, नीतियां अटकी पड़ी हैं और कैबिनेट ब्रीफिंग भी बुधवार तक अटकी रहती हैं।
मोदी की वापसी की वजह से बुधवार की बैठक हो सकी, लेकिन गुरुवार को वो फिर से प्रचार अभियान पर निकल गए। गुजरात में जून से ऐसा ही हाल है, जब भाजपा ने मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया गया।
पीछे रह गया गुजरात?
गुजरात स्टेट राइट टू पीपल बिल और गुजरात इरिगेशन एंड ड्रेनेज बिल जैसे दो अहम विधेयक अंतिम मसौदे का इंतजार कर रहे हैं। इनमें से पहला सार्वजनिक सेवाओं को लेकर वक्त तय करने से जुड़ा है। और 13 दूसरे राज्यों में इसी तरह के कानून को आधार बनाकर शुरू हो चुका है।
गुजरात ने अप्रैल में विधेयक पारित कर दिया था, लेकिन जब तक अंतिम मसौदा तैयार नहीं कर लिया जाता, तब तक इसे लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिसूचना भी जारी करनी होगी।
और कितना इंतजार?
दूसरा विधेयक राज्य के जल संसाधन से जुड़ा है और इसे भी विधानसभा के उसी सत्र में पारित किया गया था। सरकार ने अप्रैल में इसका बचाव किया था। कांग्रेस ने राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल से विधेयक खारिज करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
इसके अलावा फरवरी से कैबिनेट ने कोई बड़ा फैसला नहीं किया है। सरकार ने कैबिनेट ब्रीफिंग का सिलसिला भी बंद कर दिया है।
मोदी की गैर-मौजूदगी में आनंदी पटेल और सौरभ पटेल के साथ मिलकर मुख्यमंत्री के कामकाज का जिम्मा संभाल रहे नितिन पटेल ने कहा, "जैसे ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा, विधेयक लागू हो जाएंगे। नीतियों पर काम चल रहा है।"