बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस और भाजपा पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों दल पूंजीपतियों के पैसे से चुनाव लड़ते हैं।
सरकार में आने पर उन्हीं पूंजीपतियों के हित में नीतियां तैयार की जाती हैं। गरीब और आम लोग इन दलों की प्राथमिकता में भी नहीं हैं। इनकी गलत नीतियों के चलते ही लोग नक्सली बन रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशियों के प्रचार में आई मायावती ने यमुना विहार में हुई अपनी पहली चुनावी जनसभा में कांग्रेस-भाजपा पर खुलकर भड़ास निकाली।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से इन्हीं पार्टियों के हाथ में सत्ता रही। लेकिन इतने सालों बाद भी समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों की जिंदगी में खास फर्क नहीं आया। लोगों को अपनी जमीन को छोड़कर दिल्ली-मुंबई जैसे तमाम दूर-दराज के मेट्रो शहरों में रोजी-रोटी के लिए जाना पड़ रहा है। यहां इनके साथ सौतेला व्यवहार होता है।
उपेक्षित वर्गों के लिए नौकरियों और शिक्षा में मिली आरक्षण की सुविधा भी साजिशन खत्म की जा रही है। दिल्ली में ही दलितों के उत्थान के लिए दी गई रकम दूसरे मदों में खर्च होती है। गरीब तबके की छोटी-छोटी जमीनों को कम दामों पर हथियाकर पूंजीपतियों को दे दिया गया। इन्हीं वजहों से निचले तबके के लोग नक्सली बन रहे हैं या दूसरे गलत रास्तों पर चलने को मजबूर हैं।
उन्होंने आश्वस्त किया कि दिल्ली में बसपा की सरकार बनने पर कमजोर लोगों के साथ-साथ मुसलिम समाज के किसी भी व्यक्ति से कोई ज्यादती नहीं होगी। किसी भी निर्दोष मुस्लिम को आंतकी बताकर जेल नहीं जाने दिया जाएगा।
मायावती ने प्रवासी, गरीब और अनधिकृत कालोनियों के मतदाताओं को भी लुभाने की कोशिश की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में रही अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी इस मौके पर सिलसिलेवार ब्योरा दिया और सपा सरकार पर सांप्रदायिक दंगा फैलाने का आरोप लगाया। शाम को उन्होंने अशोक विहार में भी एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया।