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बाहर ही नहीं घर में ही भी कमजोर पड़ा मोदी मैजिक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले आए उपचुनाव के नतीजे ने भाजपा को जम कर खुशी का इजहार करने की योजना पर ब्रेक लगा दिया।
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उपचुनाव में उत्तर प्रदेश और राजस्थान ही नहीं बल्कि गृह राज्य गुजरात में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू कमजोर पड़ता दिख रहा है।

करीब तीन महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में अपना सूपड़ा साफ करा बैठी कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव में भाजपा से नौ में से तीन सीटें छीनने में कामयाबी हासिल कर ली।

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा छोड़ी गई वडोदरा की लोकसभा और मणिनगर विधानसभा सीट पार्टी ने जीत तो ली, मगर जीत का पुराना और विशाल अंतर बरकरार नहीं रख पाई।
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क्या कमजोर हो रहा पार्टी का किला?

यही नहीं भाजपा को तीन दशक बाद खंभालिया सीट कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ी। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के ठीक एक दिन पहले आए इस नतीजे से भाजपा में खामोशी है।

पार्टी के स्थानीय नेता दबे स्वर में स्वीकार करते हैं कि मोदी के बाद राज्य के कद्दावर नेता रहे अमित शाह की राज्य में अनुपस्थिति से पार्टी के प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ा है। चूंकि उपचुनाव मोदी की उत्तराधिकारी बनी मुख्यमंत्री आनंदीबेन के नेतृत्व में लड़े गए थे, इसलिए देर-सबेर उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

कांग्रेस ने दीसा, खंभालिया और मंगरौल सीटों पर भारी अंतर से विजय हासिल की है। भाजपा को मणिनगर, टंकारा, तलाजा, आनंद, खेड़ा और लिंखेड़ा सीट पर जीत हासिल हुई। मोदी की छोड़ी गई वडोदरा सीट पर पार्टी प्रत्याशी रंजनाबेन भट्ट जीत तो गए, मगर जीत का अंतर पांच लाख वोट से घट कर करीब सवा तीन लाख वोट पर सिमट गया।
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