प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को कजाकिस्तान के साथ पांच अहम समझौते करने के बाद ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के शहर उफा पहुंचे। उफा में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मोदी की मुलाकात काफी गर्मजोशी से हुई।
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मोदी और पुतिन के बीच रणनीतिक द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने और भारत को एससीओ की पूर्ण सदस्यता देने के बारे में भी चर्चा हुई। ब्रिक्स और एससीओ सम्मेलन से पहले मोदी से मुलाकात को अहम पल करार देते हुए पुतिन ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि दोनों देशों के रिश्तों के बीच सहयोग मजबूती से आगे बढ़े।’
वहीं, मुलाकात के दौरान मोदी ने भारत कोएससीओ की अगले साल तक पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया को समर्थन देने पर पुतिन का आभार जताया। वहीं पुतिन ने कहा कि एससीओ में भारत की सदस्यता देने की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है।
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योग पर भी हुई चर्चा
मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने भारत और रूस के बीच गहरे रिश्तों का भी
जिक्र करते हुए कहा कि वह सालाना द्विपक्षीय सम्मेलन की बैठक में हिस्सा
लेने के लिए इस साल के आखिर तक रूस का फिर दौरा करेंगे। छह देशों के संगठन
एससीओ के सदस्य देश रूस, चीन, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान,
तजाकिस्तान हैं।
पीएम मोदी अब 10 जुलाई तक ब्रिक्स सम्मेलन में ब्राजील,
रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका और एससीओ के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।
वहीं, भारत और पाकिस्तान चीन की अगुवाई वाले एससीओ की पूर्ण सदस्यता हासिल
करने की तैयारी में हैं।
संगठन में भारत और पाक को अभी पर्यवेक्षक देश का
दर्जा मिला हुआ है। पूरे रूस में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने पर मोदी ने पुतिन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि रूस के हर शहर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया गया।
मुश्किल होने के नाते मैंने योग नहीं किया: पुतिन
मोदी ने कहा कि दुनिया में नई पीढ़ी को सेहतमंद बनाने के लिए योग एक
संपूर्ण और बेहतर उपाय है। जवाब में पुतिन ने कहा, ‘मैं नहीं जानता कि योग
कैसे किया जाता है। जब आप लोग इस करते हैं तो यह बेहद मुश्किल नजर आता है।
इसीलिए मैंने इसे करने की कोशिश नहीं की।’
वहीं सूत्रों के मुताबिक, उफा में हीएससीओ सम्मेलन से इतर दस जुलाई को पाक पीएम नवाज शरीफ की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात होगी। हालांकि, दोनों देशों की ओर से इस मुलाकात के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रूस भारत की रेल परियोजनाओं में भागीदारी कर सकता है। जिसके लिए पैसा नव स्थापित ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक के जरिए दिया जा सकता है। इस बारे में रूस के रेलवे प्रमुख व्लादिमीर याकूनिन ने बुधवार को संकेत दिए।
ब्रिक्स में भारत देगा 18 अरब डॉलर
हाइड्रो-जेनरेशन प्रोजेक्टों को धन मुहैया कराने के लिए रूस के डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) और भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी (आईडीएफसी) ने बुधवार को एक एमओयू में हस्ताक्षर किए हैं।
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की बैठक में आरडीआईएफ के डायरेक्टर जनरल किरिल दमित्रीव ने बताया कि उनकी कंपनी ने अपने भागीदार ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ एक एमओयू में हस्ताक्षर किया है। ताकि इन देशों में बुनियादी ढांचों के लिए धन मुहैया कराया जा सके।
ब्रिक्स देशों ने 100 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का गठन किया है। इसमें भारत 18 अरब डॉलर का योगदान देगा। वहीं, 41 अरब डॉलर के साथ चीन अपना योगदान देने में शीर्ष पर है।
ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों ने डॉलर लिक्विडिटी में कोई गड़बड़ी होने की स्थिति से निपटने के लिए इस विदेशी मुद्रा भंडार का गठन किया है।
यह फंड एक बीमा कवर के तौर पर काम करेगा। किसी भी सदस्य देश में भुगतान
असंतुलन होने पर इस फंड से सहयोग मुहैया किया जाएगा। भारत के जितना ही
ब्राजील और रूस का भी योगदान होगा।
वहीं, दक्षिण अफ्रीका पांच अरब डॉलर का
योगदान देगा। इस विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच सात
जुलाई को एक करार हुआ। यह मुद्रा भंडार 30 जुलाई से काम करना शुरू कर देगा।