महंगाई को काबू में करने की सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौती से जूझ रही मोदी सरकार अब इस काम में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों की मदद लेगी। कृषि उत्पादों खासकर फलों और सब्जियों की बड़ी बर्बादी को महंगाई की एक बड़ी वजह मान रही सरकार के सात शीर्ष मंत्री इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों के साथ विचार मंथन करेंगे।
केंद्रीय मंत्री इस बैठक में जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों और खाद्य पदार्थों को बचाने के लिए भाभा परमाणु शोध केंद्र और भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग जैसे संस्थानों के शीर्ष वैज्ञानिकों से रूबरू होंगे। इस दौरान रेडियोधर्मी तकनीक से तैयार विकिरण की सहायता से फलों और सब्जियों और खाद्य पदार्थों को बचाने के रास्ते निकाले जाएंगे।
महंगाई को काबू में करने की सरकार की कोशिशों में अग्रणी भूमिका निभा रहे ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने वैज्ञानिकों के साथ सरकार के अहम मंत्रालयों की बैठक बुलाने की यह पहल की है।
सड़ जाते हैं 18 फीसदी खाद्य उत्पाद
इस बैठक में देशभर के जाने माने तीन वैज्ञानिकों का एक दल उच्च स्तरीय सात सदस्यीय अंतर मंत्रालय समूह के समक्ष इस योजना का ब्लू प्रिंट रखेगा। उल्लेखनीय है कि एक अध्ययन के मुताबिक देश भर के छह से 18 फीसदी कृषि और खाद्य उत्पाद बिना इस्तेमाल के सड़ जाते हैं।
शीर्ष वैज्ञानिक डॉ. काकोदकर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के खाद्य तकनीकी विभाग के मुखिया डॉ. एके शर्मा, रेडिएशन एंड आइसोटोप तकनीक के मुख्य कार्यकारी डॉ. एके कोहली सात मंत्रियों के सामने बुधवार को योजना का ब्लू प्रिंट पेश करेंगे।
ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडरकरी के अलावा इस बैठक में खाद्य और उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान, खाद्य राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे पाटिल, कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल, राज्यमंत्री वीके सिंह और संजीव बालियान शामिल होंगे।
महंगाई पर लगेगी लगाम: गडकरी
ग्रामीण विकास मंत्री गडकरी के मुताबिक देश में व्यापक पैमाने पर अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों के बर्बाद होने का सिलसिला इस तकनीक के इस्तेमाल के माध्यम से बेहद कम किया जा सकता है।
उनका मानना है कि इस तकनीक को देश भर में लागू करने से न केवल किसानों को व्यापक लाभ होगा, बल्कि इससे महंगाई पर भी लगाम कसने में मदद मिलेगी।
महाराष्ट्र में 10 हजार किसान कर चुके हैं तकनीक इस्तेमाल
परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ अनिल काकोदकर के निर्देशन में महाराष्ट्र के 10 हजार प्याज उत्पादक किसान इस नई तकनीक का लाभ उठा चुके हैं। सरकार की योजना देश भर में इस तकनीक का इस्तेमाल कर कच्चे माल को ज्यादा जीवन देने की है जिससे कि इनको खराब होने से बचाया जा सके।