सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अल्पसंख्यकों को लोन देने में तेजी लाने को कहा है। उनसे यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आबादी में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी के अनुपात में उन्हें लोन मिले।
हाल ही में अल्पसंख्यक मामलों के सचिव अरविंद माया राम की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इन समुदायों को लोन देने में तेजी लाने का फैसला लिया गया। इसी क्रम में सरकारी बैंकों से अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में शाखा खोलने को कहा गया था।
एक अक्तूबर से 31 दिसंबर 2014 के बीच सरकारी बैंकों ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में 238 शाखाएं खोली हैं। बुधवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में सरकारी बैंकों के प्रमुखों की हुई बैठक में भी अल्पसंख्यकों को लोन का मसला उठा था।
देश में सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी मुसलिमों की है। इसके बार ईसाई और सिख धर्मावलंबियों का नंबर आता है। इस बारे में आरबीआई के सर्कुलर में बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों को भी अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है।