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'चाय पर चर्चा' के बाद अब मोदी सरकार करेगी 'छाछ पर चर्चा'

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भूमि अधिग्रहण बिल और किसानों के मुद्दों को लेकर मचे सियासी बवाल को ठंडा करने के लिए मोदी सरकार अब छाछ (मट्ठा) पर चर्चा शुरू करेगी।
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लोकसभा चुनाव से पहले मोदी का आम जनता के साथ चाय पर चर्चा करने का फार्मूला बेहद हिट हुआ था। अब सरकार के रणनीतिकारों को लगता है कि किसान विरोधी छवि का मुकाबला करने के लिए छाछ पर चर्चा बेहद कारगर हो सकती है।

भूमि अधिग्रहण बिल पर धारणा की लड़ाई में पिछड़ने के बाद सरकार को मट्ठा मंथन का तरीका कारगर नजर आ रहा है। इसके जरिये वह सीधे जनता तक पहुंच सकेगी।
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नायडू किसानों के साथ छाछ पर कर चुके हैं चर्चा

सरकार को इसके कई फायदे भी नजर आ रहे हैं। एक तो छाछ का नाम जुड़ते ही गांव की संस्कृति का अहसास होता है, तो दूसरा गर्मी के मौसम को देखते हुए इसे किसानों और ग्रामीण जनता से जुड़ने का असरदार तरीका माना जा रहा है।

संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू परीक्षण के तौर पर हैदराबाद के कुकटपल्ली में बीते सप्ताह किसानों के साथ छाछ पर चर्चा कर चुके हैं। नायडू ने कहा कि उन्होंने 12 गांवों का दौरा किया था, जिसका उन्हें बढ़िया अनुभव रहा।

सूत्र बताते हैं कि नायडू ने पीएम मोदी के साथ अनुभव साझा किया। जिस पर मोदी ने सकारात्मक रुख दिखाया। सरकार का मानना है कि सीधा संवाद रखने से सटीक फीड बैक मिलता है।

मोदी सरकार के मंत्री किसानों के बीच जाकर उनकी समस्या को नजदीक से जानने के साथ उसका निदान करेंगे। बजट सत्र के बाद सरकार इन आयोजनों में जुटेगी।
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