गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार ने राज्य विधानसभा में लोकायुक्त संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। यदि यह विधेयक पास हो जाता है तो लोकायुक्त की नियुक्ति में राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं रह जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में 'लोकायुक्त' की लड़ाई हार चुके हैं मोदी
लोकायुक्त आयोग बिल-2013 में लोकायुक्त के अलावा चार उप लोकायुक्त हो सकते हैं। इनके चयन के लिए 6 सदस्यीय समिति होगी।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को झटका देते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति पर राज्यपाल के फैसले को सही ठहराया था।
समिति में मुख्यमंत्री, दो कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता होंगे। ये समिति केवल नामों का सुझाव दे सकती है। लोकायुक्त के चयन पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री का ही होगा। यानी लोकायुक्त की नियुक्ति में राज्यपाल को बाहर का रास्ता दिखाते हुए इसका सीधा फैसला मुख्यमंत्री के हाथ होगा।
मोदी सरकार पर उठे सवाल
इस नए विधेयक को लेकर मोदी सरकार पर सवाल भी उठ रहे हैं। अगर ये बिल पास हो गया तो लोकपाल की नियुक्ति में राज्यपाल की भूमिका नहीं रह जाएगी। अब तक लोकायुक्त के चयन में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की भूमिका होती थी।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि वो किसी भी हालत में इस विधेयक को पास नहीं होने देंगे। उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा के बजट सत्र का आज आखिरी दिन है।