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लोकपाल चयन को लेकर मोदी सरकार ने लिया ये फैसला

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केंद्र सरकार ने लोकपाल के अध्यक्ष तथा सदस्यों के चयन के लिए गठित समिति के पांचवें सदस्य को चुने जाने की प्रक्रिया में परिवर्तन किया है।
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प्रख्यात कानूनविद को नामित करने के बजाए चयन समिति के चार सदस्य पांचवें सदस्य को चुने जाने की सिफारिश राष्ट्रपति से करेंगे। पहले राष्ट्रपति को प्रख्यात कानूनविद को नामित करने का अधिकार दिया गया था।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने जवाब में याचिकाकर्ता के उस आरोप को नकार दिया है जिसमें प्रख्यात वकील को लोकपाल चयन समिति के सदस्य के तौर पर चुनने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया था।
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याद रहे की यूपीए-2 सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव को पांचवें सदस्य के तौर पर चुना था और तब भाजपा नेता अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने संसद में उनके चयन का विरोध किया था।

लेकिन अब भाजपा सरकार प्रख्यात अधिवक्ता पीपी राव के चयन की प्रक्रिया का बचाव कर रही है और कह रही है कि सीधे तौर पर प्रख्यात वकील का चुना जाना गैर कानूनी नहीं था।
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

कार्मिक मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि लोकपाल तथा उसके सदस्यों को चुनने के लिए पांच सदस्यीय चयन मंडल में एक बदलाव किया गया है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित चयन समिति में लोकसभा की स्पीकर, लोकसभा में विपक्ष के नेता तथा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं।

पांचवें सदस्य के रूप में जानेमाने कानूनविद को शामिल करने का प्रावधान है। लेकिन इस कानूनविद का चयन कैसे किया जाए, इसमें बदलाव किया गया है। पहले राष्ट्रपति को यह अधिकार था वह कानूनविद नामित करे।

अब प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यों की समिति प्रख्यात कानूनविद के नाम की सिफारिश करेगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद कानूनविद को चयन समिति में शामिल किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि राज्य सभा और लोकसभा संशोधन पारित कर चुके हैं।
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