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चिकन से महंगी हुई दाल, सरकार पर सवाल

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अरहर दाल की खुदरा कीमत 200 रुपये प्रति किलो हो गई है जबकि एक साल पहले यह बाजार में 85 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। यह आंकड़े उपभोक्ता मंत्रालय के हैं। जबकि चिकन 180 से 190 रुपए किलोग्राम तक बिक रहा है। आमतौर पर चिकन दाल की तुलना में दोगुना महंगा रहा है।
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2014 लोकसभा चुनाव के ठीक पहले गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कई टीवी साक्षात्कार में दिखे और उन्होंने साक्षात्कार में दालों सहित आवश्यक जिंसों की कीमतों को नियंत्रित करने में असफलता के लिए मनमोहन सिंह सरकार को आड़े हाथों लिया था।

मोदी ने उस समय कीमतों को नियंत्रित करने और दालों व गेहूं की किल्लत से निपटने के लिए योजना पेश की थी। लेकिन मोदी का अर्थशास्त्र और वित्त मंत्री अरुण जेटली कीमतों को नियंत्रित करने के मोर्चे पर असफल रहे हैं और इसका वित्तीय बोझ आम आदमी पर पड़ रहा है।
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चिकन से महंगी हुई दाल

ऐसे समय में जब प्याज पहले से लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है और दालों की कीमतें भी उच्चतम स्तर पर हैं। प्याज 80 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंचने के बाद अब भी 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है। कीमतों के लिहाज से अगर पूरी स्थिति पर गौर करें तो दशहरा और दिवाली लोगों के लिए निराशाजनक और बेस्वाद रहने वाली है।

2014 के लोकसभा चुनावों से पहले टीवी साक्षात्कार में मोदी ने यूपीए 2 सरकार पर कीमतों को नियंत्रित करने में असफलता और जिंसों की किल्लत का अनुमान लगाने के लिए रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल करने में असफलता का आरोप लगाया था।

अब 2015 में चीजें इतने खराब स्तर पर पहुंच गईं हैं कि दाल मुर्गे से भी महंगी हो गई है। चिकन अब 180 रुपये प्रति किलो के स्तर पर  उपलब्ध है जबकि अरहर दाल ने 200 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया है। वहीं सरकार इससे कुछ खास चिंतित नजर नहीं आ रही है।

वास्तव में जब प्याज की कीमतें पिछले दो माह में 25 रुपये प्रति किलो से बढ़ कर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही थी, उस समय सरकार 27 रुपये प्रति किलोग्राम में प्याज का निर्यात कर रही थी।

जब कीमतें बेकाबू हो गईं और 80 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं तो सरकार ने 47 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर 3,000  टन प्याज का आयात किया। मोदी सरकार दालों और प्याज को लेकर वही सब कुछ कर रही है, जिसके लिए मोदी ने यूपीए 2 सरकार पर आरोप लगाया था।

क्या मोदी बताएंगे कौन सा वैज्ञानिक तरीका अपनाया

इसी तरह से, यह सबको पता था कि भारतीय सूखे जैसी स्थिति का सामना करेंगे और भारतीय मौसम विभाग ने दाल, गेहूं और चावल के प्रमुख उत्पादक इलाकों में कम बारिश का अनुमान जताया था।

इसके बावजूद सरकार सोई रही और आम आदमी को ऊंची कीमतों और जमाखोरों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर वस्तुओं और दालों का आयात करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को ट्वीट किया है कि मोदी 2014 में दालों से निपटने की बात कर रहे थे अब दाल 200 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बिक रही है। दि‌ग्विजय ने पूछा है, "क्या अब मोदी हमें बताएंगे कि उन्होंने कौन सा वैज्ञानिक तरीका अपनाया है जिससे दालें 200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रहीं हैं? अच्छे दिन आ गए।"
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अरहर दाल 200 रुपये प्रति किलो

दाल की कीमतों पर लगाम लगाए जाने के तमाम दावों के बावजूद अरहर दाल की कीमत 200 रुपये प्रति किलो तक हो गई। बीते सप्ताह खुदरा बाजार में यह 185 रुपये प्रति किलो मिल रही थी।

अरहर का उत्पादन 2014-15 में 20 लाख टन से घटकर 17.2 लाख टन रह जाने से बीते कुछ माह से इसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अरहर दाल की खुदरा कीमत 200 रुपये प्रति किलो हो गई है जबकि एक साल पहले यह बाजार में 85 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।

पिछले साल तक करीब पांच सालों तक अरहर दाल की कीमत 74 से 85 रुपये प्रति किलो के दायरे में रही थी। उड़द 170 रुपये प्रति किलो रही जबकि कुछ दिनों पहलो यह 187 रुपये प्रति किलो रही थी।

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