हर नीतिगत मसले और विवादों को जीओएम (मंत्री समूह) व ईजीओएम (उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह) के हवाले करने की यूपीए सरकार की परिपाटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खत्म करने का फैसला किया है। इस फैसले से साफ हो गया है कि अब मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्रियों को फैसले लेने की आजादी मिलेगी, साथ ही जवाबदेही भी तय होगी। नीतिगत मसलों और प्रस्तावों पर तुरंत फैसले करने के लिहाज से इस कदम को अहम माना जा रहा है।
पीएम के इस कदम के बाद अब संबंधित विभागों के मंत्री ही लंबित मामलों पर फैसला लेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा है कि 9 ईजीओएम और 21 जीओएम भंग करने के कदम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और व्यवस्था में अधिक जवाबदेही आएगी। सरकार के उच्च स्तर के अधिकारियों का कहना है कि पीएम के इस फैसले से कैबिनेट की सर्वोच्चता और धाक को फिर से बहाल किया जा सकेगा।
पीएमओ ने कहा कि मंत्रालय और विभाग अब ईजीओएम और जीओएम के समक्ष लंबित मुद्दों पर विचार करेंगे और मंत्रालय तथा विभाग के स्तर पर ही उचित फैसला करेंगे। पीएमओ ने कहा कि जहां कहीं भी मंत्रालयों को कठिनाई आएगी कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ निर्णय लेने की प्रक्रिया में मदद करेंगे।
पिछली सरकार से मोदी ने लिया सबक
पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार पर नीतिगत अपंगता का आरोप लगता रहा है। हर छोटे बड़े मामलों पर मंत्रियों के समूह गठित कर दिए जाते थे, जो सालों साल निर्णय लेने में विफल रहते थे। साथ ही मंत्रालयों को भी अपने कार्य क्षेत्र से जुड़े मामले में निर्णय लेने की आजादी खत्म हो गई थी।
यूपीए वन सरकार में 50 से अधिक जबकि यूपीए दो में 30 जीओएम-ईजीओएम थे। यूपीए वन में ज्यादातर जीओएम और ईजीओएम के अध्यक्ष मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे। उस समय विपक्ष ने चुटकी लेते हुए उन्हें जीओएम मंत्री कहना शुरू कर दिया था।
यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में ये जिम्मेदारी पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी और वित्तमंत्री चिदंबरम के कंधों पर आ गई थी। भ्रष्टाचार, अंतर राज्यीय जल विवाद, प्रशासनिक सुधार और गैस व दूरसंचार सेवाओं के मूल्य जैसे मुद्दों पर फैसले के लिए समूहों का गठन किया गया था। यूपीए सरकार के कार्यकाल में ईजीओएम के पास केंद्रीय मंत्रिमंडल की तर्ज पर फैसले लेने का अधिकार था, जबकि जीओएम की सिफारिशें अंतिम फैसले के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश की जाती थी।
मोदी ने महासचिवों से कहा...
अपनी सरकार के कामकाज का सौ दिन का एजेंडा तय करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह अपने निवास पर पार्टी महासचिवों के साथ बैठक की। मोदी ने नेताओं से कहा कि लोकसभा चुनाव की जीत के उत्साह में संगठन के काम में सुस्ती नहीं आनी चाहिए।
मोदी रविवार को भाजपा मुख्यालय में कार्यरत कर्मचारियों, कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलेंगे। साथ ही भाजपा पार्टी मुख्यालय में तैनात सभी कर्मचारियों को तीन माह का वेतन बतौर बोनस देगी।