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जानिए मोदी के नए मंत्रियों के बारे में अनसुनी बातें

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विजय सांपला: पंजाब के दलित नेता और होशियारपुर से सांसद विजय सांपला को मोदी ने राज्यमंत्री बनाया है। 53 साल के सांपला की कहानी बेहद उतार चढ़ाव और संघर्ष से भरी है। मैट्रिक पास सांपला पहले खाड़ी देश में प्लंबर के रूप में काम करते थे। बाद में जब वह पंजाब लौटे तो उन्होंने अपना कारोबार शुरु किया और गांव के सरपंच बने। इसके बाद तो उनका राजनीतिक कद बढ़ता गया।
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सांवरलाल जाट: अजमेर के रहने वाले सांवरलाल जाट राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। इसके बाद वह राजनीति में आए और लोकदल व जनता दल में रहे। कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट को हराकर वह पहली बार लोकसभा में पहुंचे हैं।

पहले बैंक में काम करते थे बाबुल सुप्रियो

हरिभाई चौधरी: हरिभाई चौधरी बनासकांठा (गुजरात) से सांसद है। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से एमकॉम किया है। राजनीति में आने से पहले वह एक बड़े किसान और कारोबारी थे।

साध्वी निरंजन ज्योति: यूपी के फतेहपुर से सांसद साध्वी निरंजन ज्योति भी अब मोदी कैबिनेट का हिस्सा हैं। वे मात्र दसवीं तक पढ़ी हैं। उनके हलफनामे के मुताबिक उनका काम धर्म प्रचार है।

बाबुल सुप्रियो: बाबुल ने अपने करियर की शुरुआत स्टैंडर्ड बैंक के साथ की थी लेकिन बैंक की नौकरी में उनका मन नहीं लगा और वो बॉलीवुड की तरफ मुड़ गए। कई फिल्मों में उन्होंने गाना गया। इसके बाद उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाने का सोचा और फिर बीजेपी के टिकट पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल से लोकसभा चुनाव लड़ा और बंपर जीत हासिल की।

ऑल इंडिया में अनाउंसर थे जयंत सिन्हा

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर: राठौर पहली बार तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने ओलंपिक में सिल्वर मेडल हासिल किया था। सेना के अफसर और बेहतरीन शूटर के रूप में उनकी पहचान थी। सेना से वीआरएस लेने के बाद वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गए। जयपुर ग्रामीण सीट से उन्होंने जीत दर्ज कराई औऱ अब मोदी ने उन्हें अपनी कैबिनेट का हिस्सा बनाया है।

जयंत सिन्हा: जयंत ने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की है। वे ऑल इंडिया रेडियो में अनाउंसर भी रहे हैं। आईआईटी के बाद वे पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय गए और फिर हावर्ड विश्वविद्यालय में पढ़े। इसके बाद उन्होंने बोस्टन की एक कंपनी में नौकरी कर ली। 2002 में वो भारत वापस लौटे। पिता यशवंत सिन्हा राजनीति में थे तो उनकी रुचि भी इस ओर होने लगी। 2014 में उन्होंने झारखंड की हजारीबाग सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कराई।

वाईएस चौधरी: चौधरी ने 1984 में हैदराबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिग में डिग्री हासिल की थी। इसके बाद कोयंबटूर से उन्होंने मास्टर्स किया। इसके बाद उन्होंने सुजाना ग्रुप की स्थापना की जो पद्मिनी नाम से पंखे और अन्य विद्युत उपकरण बनाती थी। 2010 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
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रामकृपाल के पास है LLB की डिग्री

गिरिराज सिंह: गिरिराज सिंह बिहार के नवादा से सांसद हैं। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था। गिरिराज सिंह काफी पहले से राजनीति में सक्रिय हैं। हिंदूवाद और मोदी समर्थन ही उनकी पहचान हैं। वह नीतीश कुमार की सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

मोहन कुंदरिया: मोहन कुंदरिया राजकोट से सांसद हैं। पहली बार संसद पहुंचे कुंदरिया इलाके के सफल किसानों में शुमार किए जाते हैं। वह तब चर्चा में आए थे जब एक वीडियो जारी हुआ था जिसमें वह बच्चों की पीठ पर चलते दिखाई दे रहे थे।

रामकृपाल यादव: रामकृपाल मगध विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट हैं, उनके पास LLB की डिग्री भी है। वह लालू के खास तो थे लेकिन कभी मंत्री नहीं बनाए गए। टिकट को लेकर बात बिगड़ी तो उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया।
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