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क्या पूरा होगा मोदी का ये बड़ा सपना?

Thu, 18 Sep 2014 08:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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केंद्र सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के तहत मिडिल स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर का ज्ञान कराने के लिए सिस्टम उपलब्ध कराए जाने थे। लेकिन वाराणसी के 354 स्कूलों में से सिर्फ सौ को ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सिस्टम मिले। बाकी 254 स्कूल अब भी कंप्यूटर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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दूसरी तरफ जहां कंप्यूटर भेजे गए वहां हालत यह है कि कहीं सिस्टम आलमारी में बंद हैं तो कहीं धूल फांक रहे हैं। बच्चों को तो यह भी पता नहीं है कि उनके लिए स्कूल में कंप्यूटर भी है।

मजे की बात यह भी है कि कुछ स्कूलों में उनके लिए आवंटित कंप्यूटर भेजने के बजाय बीएसए कार्यालय ने अपने ही पास रख लिया है। इतना ही नहीं, जिन गिनती के स्कूलों में कंप्यूटर ठीक रहे हैं उन्हें चुनाव के दौरान प्रशासन ने मंगा लिया है।
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कई साल से खराब पड़े कंप्यूटर

केशरीपुर के प्रधानाध्यापक राजेश त्रिपाठी कहते हैं कि वर्ष 2005 में कंप्यूटर मिला था। काफी पुराना हो जाने के कारण वह काम लायक नहीं रह गया है। लोहता के प्रधानाध्यापक राजेंद्र शर्मा का कहना है कि कंप्यूटर कई साल से खराब होने के कारण बंद पड़ा है।

केशरीपुर मिडिल स्कूल के कक्षा आठ के छात्र दीपक का कहना है कि वह कभी स्कूल के कंप्यूटर के पास गया ही नहीं। माउस के बारे में कुछ नहीं जानता। वहीं, लोहता मिडिल स्कूल के कक्षा आठ की छात्रा रोशनी सिंह ने बताया कि स्कूल में कंप्यूटर नहीं सिखाया जाता है। मुझे नहीं मालूम कि यहां कंप्यूटर भी है।

एडी बेसिक विजय शंकर मिश्र ने इस बारे में बताया कि जिन विद्यालयों के कंप्यूटर खराब पड़े हैं उन्हें ठीक कराया जाएगा। जहां कंप्यूटर शिक्षक नहीं हैं, वहां बच्चों को कंप्यूटर सिखाने की जिम्मेदारी संविदा पर तैनात शिक्षकों को दी गई है।
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मिसाल-1

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, केशरीपुर। यहां बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा के लिए एक सिस्टम उपलब्ध कराया गया है। वर्षों से खराब यह कंप्यूटर प्रधानाचार्य के कक्ष में आलमारी में बंद है। कंप्यूटर शिक्षक भी नहीं हैं।

मिसाल-2
पूर्व माध्यमिक विद्यालय, लोहता। यहां तीन कंप्यूटर रखे हुए हैं। मगर तीनों पर धूल जमा है और तीनों कबाड़ हो चुके हैं। सिस्टम के बारे में बच्चों को पता भी नहीं है और शिक्षक उधर झांकते तक नहीं हैं।

वाराणसी के ये दो स्कूल तो मिसाल हैं मिडिल स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा की बदहाली की। कमोबेश ऐसी ही हालत डिजिटल इंडिया का सपना देखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने संसदीय क्षेत्र काशी के सौ से अधिक उन सरकारी स्कूलों की भी है जहां बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के लिए सिस्टम मुहैया कराए गए हैं। फिर कोई क्यों न कहें कि प्रधानमंत्री मोदी का सपना उनके ही संसदीय क्षेत्र में दम तोड़ रहा है।
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