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मोदी PM बने, तो अमित शाह CM नहीं कुछ और बनेंगे

Wed, 23 Apr 2014 11:02 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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नरेंद्र मोदी इन दिनों रैलियों की रेल पर सवार है। भाजपा यह मानकर चल रही है कि इन दिनों देश में मोदी की लहर है और अगर ज्यादा से ज्यादा वोटरों तक पहुंचना है, तो उन्हें खुद पहुंच बनानी होगी।
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वो अब तक सौ से ज्यादा रैलियां कर चुके हैं और आगे भी उनका कुछ ऐसा ही कार्यक्रम है। लेकिन अब देखना यह है कि निजी हमलों और ध्रुवीकरण की आड़ में हो रहे लोकसभा चुनाव के नतीजे किसके पाले में जाएंगे।

अगर दिल्ली का किला कब्जाना मोदी की सबसे बड़ी चुनौती है, तो उनकी दूसरी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर वो वाकई जीते, तो गुजरात के सीएम की कुर्सी किसे देंगे?
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आनंदीबेन और अमित शाह में मुकाबला

टीओआई के मुताबिक नरेंद्र मोदी को इस सवाल का जवाब तलाशते वक्‍त संतुलन का सिद्धांत याद रखना होगा, क्योंकि कुर्सी एक है। लेकिन इसके दावेदार दो हैं और दोनों मोदी के करीबी बताए जाते हैं।

एक तरफ राजस्व मंत्री आनंदीबेन पटेल और दूसरी तरफ गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह हैं। अगर मोदी पीएम की कुर्सी तक पहुंचे, तो उन्हें सीएम की कुर्सी के लिए इनमें से एक को चुनना होगा।

मोदी कैंप में आनंदीबेन और अमित शाह, दोनों की काफी अहमियत है और गुजरात के मुख्यमंत्री की चिंता यह है कि इन दोनों के बीच गजब की प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता रही है।

आनंदीबेन को मिलेगी सीएम की कुर्सी

सूत्रों की मानें, तो आनंदीबेन पटेल मोदी की जगह गुजरात की सीएम बन सकती हैं, जबकि अमित शाह को लेकर भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने अब तक कुछ सोचा नहीं है।

इन दिनों अमित शाह उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रचार अभियान संभाल रहे हैं। अमित शाह के भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा। हालांकि, कई नेताओं का मानना है कि इस पद के लिए वो अभी काफी जूनियर है।

ऐसे में यह खबर सामने आ रही है कि अगर मोदी पीएम बनते हैं, तो अमित शाह को गुजरात के सीएम की कुर्सी या राष्ट्रीय अध्यक्ष का जिम्मा नहीं, बल्कि पीएमओ में जगह दी जा सकती है।

दोनों जीते, तो वडोदरा छोड़ेंगे मोदी

यह भी कहा जा रहा है कि अगर नरेंद्र मोदी वाराणसी और वडोदरा, दोनों सीटों पर जीतने में कामयाब रहते हैं, तो वो वडोदरा सीट छोड़ेंगे। अहमदाबाद से विधायक शाह इस सीट पर मोदी की जगह ले सकते हैं।

इसके अलावा गुजरात के ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल के नाम की भी चर्चा है, जो वडोदरा से विधायक हैं और मोदी के लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान का अहम हिस्सा रहे हैं।

एक भाजपा नेता ने कहा, "मोदी पटेल को भी साथ ले सकते हैं, क्योंकि वो ऊर्जा मंत्री के रूप में उनके प्रदर्शन से काफी प्रभावित है।" अब देखना यह है कि अगर मोदी की किस्मत खुली, तो साथ में किसकी लॉटरी लगेगी।
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बढ़ सकती है दूसरे नेताओं की टेंशन

अगर अमृतसर सीट से अरुण जेटली जीतने में कामयाब रहते हैं, तो इनमें से कोई एक राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंच सकता है। सूत्रों का कहना है कि अमित शाह तब तक दिल्ली में वक्त गुजारना चाहेंगे, जब तक गुजरात का सीएम बनने का मौका उनके सामने नहीं आता।

यह बात भी समझी जा सकती है कि भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता अमित शाह को गुजरात में ही देखना चाहेंगे, क्योंकि मोदी की वजह से पार्टी में उनका कद तेजी से बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश में अगर पार्टी को बड़ी कामयाबी मिली, तो शाह की रफ्तार और तेज होगी।

ऐसे में लालकृष्‍ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि यूपी में जीत के मायने यह होंगे क‌ि अमित शाह के सिर पर सेहरा आ जाएगा।
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