अरुणाचल प्रदेश में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) घोटाले की जांच कर रहे लापता आईपीएस अधिकारी मयंक सिंह चौहान रविवार सुबह नाटकीय अंदाज में दिल्ली के मेहरम नगर स्थित आवास पर पहुंच गए। पड़ोसियों द्वारा सूचना देने के बाद द्वारका में रहने वाली उनकी मां और बहन भी वहां पहुंच गईं। दोनों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, इसलिए अधिकारी के लापता होने का रहस्य अब भी बरकरार है। यहां तक कि पुलिस अधिकारी भी इस बारे में जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं।
चौहान के घर पहुंचने के बाद से पड़ोसियों और पुलिस का उनके घर आना-जाना लगा हुआ है। उनकी मां शकुंतला चौहान ने बताया कि मयंक की तबीयत खराब है और ठीक होने के बाद वह खुद ही इस रहस्य से पर्दा उठाएंगे। बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ सप्ताह पहले उनकी मां और परिवार के सदस्य द्वारका सेक्टर सात स्थित डीडीए फ्लैट में रहने चले गए थे। मयंक चौहान की मां के घुटने में दर्द है और मेहरम नगर में पहली मंजिल पर घर होने के कारण उन्हें काफी दिक्कत होती थी।
1998 बैच के आईपीएस अधिकारी मयंक मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के तिप्पी इलाके से गायब हो गए थे। उस समय वह अपने कर्मचारियों के साथ ईटानगर से तवांग जा रहे थे। तिप्पी बाजार के पास वह कार से नीचे उतर गए और ड्राइवर से पैदल चलने की बात कही। काफी देर बाद भी जब वह नहीं लौटे तो मयंक के लापता होने की सूचना दी गई। चौहान को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पीडीसी में हुए करीब एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले के लिए विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया था।