काफी तादाद में नाबालिग बच्चे बाल सुधार गृहों की जगह देश की तमाम जेलों में बंद हैं।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को मिल रही जानकारी के मुताबिक उम्र की सही सूचना नहीं होने की वजह से काफी संख्या में बच्चे सलाखों में कैद रहने को विवश हैं।
इसके अलावा कई ऐसे मामले भी उजागर हुए हैं जिनमें नाबालिग आरोपी जानबूझकर जेल पहुंचे हैं, क्योंकि उन्हें सुधार गृह की तुलना में जेल से आसानी से निकलने की उम्मीद बधाई गई थी।
हाल में ही आयोग ने राजधानी के तिहाड़ जेल का मुआयना करने पर पाया कि जेल में सैकड़ों कैदी ऐसे हैं जो देखने में 18 वर्ष से कम आयु के लगते हैं, लेकिन उनकी उम्र 18 से अधिक दर्ज है।
एनसीपीसीआर चेयरपर्सन कुशल सिंह ने बताया कि इन कैदियों की वास्तविक उम्र जानने के लिए छानबीन शुरू की गई है। जब देश के प्रमुख जेल की स्थिति ऐसी है तो दूसरे राज्यों के जेलों की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
कुशल सिंह ने कहा कि आयोग इस संदर्भ में जल्द ही अन्य राज्यों का दौरा करेगा। ताकि ऐसे कैदियों की सही जानकारी हासिल हो सके।
उन्होंने कहा कि नाबालिग कैदियों की जगह जेल की बजाए बाल सुधार गृहों में है, लेकिन कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं जिनमें जल्द जमानत दिलाने के लिए वकील की ओर से नाबालिगों की अधिक उम्र दर्ज कराने की सलाह दी जा रही है।
यह भी देखने को मिला है कि पुलिस के असंवेदनशील और गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण भी तिहाड़ में किशोर सजा काट रहे हैं। हालांकि जेल प्रशासन नाबालिग बच्चों के जेल में कैद होने की बात से इंकार कर रहा है।
दरअसल, हाईकोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय विधिक प्राधिकरण को ऐसे मामलों की पड़ताल करने के निर्देश मिले थे।
इस आदेश पर आयोग ने अपनी ओर से जांच शुरू की और पहली दफा की गई छानबीन में केवल तिहाड़ जेल में ही सैकड़ों ऐसे मामले उजागर होने की आशंका दिख रही है।
गौरतलब है कि दो माह पहले दिल्ली पुलिस ने करीब 150 नाबालिगों के तिहाड़ जेल में बंद होने का खुलासा दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष किया था।