चुनाव के दौरान 18 साल से कम उम्र के बच्चों से प्रत्याशियों का गुणगान कराने, पोस्टर चिपकाने, नारे लगवाने और पर्चा बंटवाने पर चुनाव आयोग ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है।
चुनावी रैली और बैठकों में नाबालिगों की भागीदारी नेताओं और पार्टियों के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को बाल श्रम के खिलाफ चेतावनी देते हुए चिट्ठी लिखी है।
आयोग ने कहा है कि पार्टियां विधानसभा और लोकसभा चुनावों में एहतियात बरतते हुए इसका ख्याल रखें। चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से इसी वर्ष 15 जुलाई को जारी किये गए फैसले का हवाला दिया है।
इसमें कहा गया है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गैर अनुसूचित पेशा और प्रक्रिया को लेकर जिस तरह जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 को लागू किया गया है उसी तरह 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए भी यह मान्य होगा। हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर यह फैसला दिया है। इसलिए ऐसे मामलों पर अंकुश लगाई जाए।
मालूम हो कि राष्ट्रीय बाल आयोग की गुहार पर चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों को चिट्ठी भेजी है। दरअसल पिछले चुनावों में बच्चों को प्रतिदिन 20 रुपए देकर पोस्टर चिपकाने, नारा लगाने जैसे कई मामले सामने आने पर राष्ट्रीय बाल आयोग ने आपत्ति जताई थी।