संचार और सूचना-प्रौद्योगिकी (कम्यूनिकेशन एंड आईटी) मंत्री मिलिंद देवड़ा ने दागी सांसदों और विधायकों को अयोग्य घोषित होने से बचाने वाले अध्यादेश का विरोध किया है।
उन्होंने कहा है कि इस तरह का कदम लोकतंत्र में लोगों का विश्वास कम करेगा।
उन्होंने ट्वीट कर कहा है कानूनी पक्ष अलग है लेकिन दोषी सांसदों और विधायकों को अपील के दौरान अपनी सीट पर बने रहने देने से लोकतंत्र में पहले से कम पड़ता भरोसा और खतरे में पड़ जाएगा।
इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली राष्ट्रपति से मिल चुके हैं। ऐसे में लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं से राष्ट्रपति से इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने का अनुरोध किया है।
अध्यादेश को बुधवार को राष्ट्रपति के समर्थन के लिए भेजा गया था। ऐसे में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले देवड़ा की यह टिप्पणी बेहद प्रासंगिक हो गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी कहा था कि अच्छा होता राष्ट्रपति के पास इस अध्यादेश को भेजने से पहले आम सहमति बना ली जाती। लेकिन अगर सरकार ने इसे भेजा है तो जरूर उसके पास कोई मजबूरी होगी।
माना जाता है कि मंत्री अपने सरकार के फैसलों की आलोचना नहीं करते हैं। लोकतांत्रिक परंपरा के मुताबिक वे कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी से बंधे होते हैं। लिहाजा देवड़ा की यह टिप्पणी लोगों को हैरान कर रही है।