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मसर्रत की रिहाई को मोदी सरकार ने सही माना

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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले सप्ताह लोकसभा में कश्मीर के कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई की आलोचना की थी, जबकि अब उन्हीं के मंत्रालय ने रिहाई के फैसले को सही ठहराया है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि मसर्रत की रिहाई के दस्तावेज को बारीकी से देखने से पता चलता है कि उसकी रिहाई कानूनी रूप से सही है। पीडीपी सरकार ने बहुत दिनों से रुके एक फैसले को केवल अमल में लाया। अधिकारियों का कहना है कि मसर्रत आलम छह महीने से गैरकानूनी ढंग से हिरासत में था।

गृहमंत्रालय के अधिकारी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि मसर्रत को पिछले सितंबर से गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखा गया था। अधिकारी ने कहा, 'मंत्रालय यही उम्मीद करता है मसर्रत गैर कानूनी हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं करेगा।
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'मसर्रत मामले में उमर सरकार ने बरती लापरवाही'

गृहमंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि जम्‍मू के जिला अधिकारी के पास इस मामले में अधिक जानकारियां हैं। उन्होंने बताया कि आलम ने अपनी रिहाई के लिए कोर्ट में याचिका दी थी। कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दे दिया।

अधिकारी ने बताया कि मसर्रत को हिरासत में रखने का अंतिम आदेश जम्‍मू के डीएम ने 24 सितंबर, 2014 को दिया था। कोर्ट ने कहा था कि मसर्रत की रिहाई के आदेश को अमल में लाने से पहले उसे एक हफ्ते का समय दिया जाए ताकि वह कोर्ट में अपील कर सके। हालांकि मसर्रत की रिहाई के आदेश को मंजूरी नहीं दी गई और उसे कोर्ट में अपील करने का समय भी नहीं दिया गया।

गृहमंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मसर्रत के मामले में उमर अब्दुल्‍ला की सरकार ने लापरवाही बरती थी। उल्लेखनीय है कि मसर्रत को गत सात मार्च को कश्मीर की बारामुला जेल से रिहा किया गया था।
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