उम्र का शतक लगाने के करीब पहुंचे परमेश्वरी दत्त अंग्रेजों के जमाने के थानेदार हैं। 98 की उम्र में भी सीधे तक कर खड़े होते हैं। 38 साल तक पुलिस की नौकरी की।
आज पुलिस वालों पर आम जनता, हिरासतियों के उत्पीड़न के आरोप बहुधा लगते हैं लेकिन परमेश्वरी दत्त ने मां से किया वादा निभाते हुए अपनी पूरी नौकरी के दौरान कभी किसी को नहीं पीटा। न ही किसी हिरासती को कभी भूखा रखा। 1976 में सेवानिवृत्त होने के बाद 40 साल से पेंशन लेने वाले परमेश्वरी दत्त में अभी भी अंग्रेजों ने जमाने की ठसक बरकरार है।
रियल लाइफ में अंग्रेजों के जमाने के थानेदार परमेश्वरी दत्त गढ़वाल के लेआड़ी में एक ब्राह्मण परिवार में बीस जून 1918 को पैदा हुए थे। मैट्रिक पास करने के बाद परमेश्वरी दत्त एक अप्रैल 1938 में पुलिस में भर्ती हो गए थे। पहली तैनाती देहरादून में रही। पहली सैलरी 13 रुपये मिली थी।
आजादी के बाद सहारनपुर और उसके बाद मुरादाबाद तैनात रहे। 1951 से 1953 तक परमेश्वरी दत्त मुरादाबाद के मुगलपुरा कोतवाली के थानेदार रहे।
परमेश्वरी दत्त बताते हैं कि तब उनके क्षेत्र में आधा शहर और 115 गांव आता था। जबकि बाकी आधा शहर और 109 गांव सदर कोतवाली में आते थे। मुगलपुरा थाने की सीमा नैनीताल तक लगी थी। परमेश्वरी दत्त तीस जून 1976 को सिविल लाइंस थाने से सेवानिवृत्त हो गए थे।