राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली मायावती का रवैया बृहस्पतिवार को नरम रहा। बसपा सुप्रीमो ने अंसारी के प्रति आस्था जताते हुए कहा कि वह उनकी बहुत इज्जत करती हैं।
इसके साथ ही उन्होंने सदन चलाने में पूरा सहयोग देने का भी भरोसा दिलाया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, नेता विपक्ष अरुण जेटली ने भी सभापति को सम्मान देने के साथ ही आश्वासन दिया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष उनके सम्मान को बरकरार रखने के लिए एक स्वर में बोलेगा।
बुधवार को सदन में मायावती द्वारा खुद पर गंभीर आरोप लगाए जाने से सभापति अंसारी काफी आहत थे। इस प्रकरण के बाद उन्होंने तमाम दलों के सदस्यों से अपने पद पर नहीं बने रहने की बात कही थी। इसके बाद सरकार सभापति को मनाने के लिए हरकत में आ गई। बसपा सुप्रीमो को खेद जाहिर करने के लिए मनाया गया।
बृहस्पतिवार सदन की कार्यवाही के दौरान मायावती का रवैया बदला हुआ था। प्रश्नकाल के बाद उन्होंने कहा कि मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूं और आसन का भी सम्मान करती हूं। मुझे इसका पूरा भरोसा है कि आसन जरूर ऐसा कोई रास्ता निकालेगा, जिससे दबे कुचले लोगों की आवाज सुनी जा सके। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री और विपक्ष से प्रमोशन में आरक्षण संबंधी बिल को पारित कराने के लिए सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि जो लोग बिल के विरोध में है, उनसे बात करके अड़चनों को दूर किया जाना चाहिए।
बसपा प्रमुख के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अंसारी के प्रति आस्था जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सदन के सभी दलों के साथ मिलकर इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि आसन को पूरा सम्मान और सहयोग मिल सके, जिसके लिए आप और यह सम्मानित आसन हकदार है।
वहीं विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अंसारी को भरोसा दिलाया कि यह सदन व्यक्ति के रूप में और जिस पद पर आप बैठे हैं, उसकी गरिमा के रूप में आपके सम्मान को बरकरार रखने के लिए एक स्वर में बोलेगा। जेटली ने कहा कि विरोधाभासों को हल करना ही भारतीय संसदीय लोकतंत्र की मजबूती है।
माकपा सीताराम येचुरी समेत सभी दलों के सदस्यों ने इस बात से खुद को संबद्ध किया। इसके बाद अंसारी ने मायावती, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता की बात के लिए आभार जताते हुए सदन चलाने के लिए सहयोग मांगा।