अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में जमियत उलेमा ए हिंद के मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि हो सकता है कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पहला और आखिरी मौका हो।
मौजूदा सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में उन्हें (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को) मजबूत प्रशासक माना जाता था। भारतवासियों को ये लगा कि ये प्रशासनिक क्षमता देश के काम आएगी, हालांकि इन डेढ़ सालों में ऐसी कोई बात नहीं दिखी।
अच्छे दिनों का वादा कर सत्ता में आई मोदी सरकार की असफलताएं गिनाते हुए मौलाना मदनी ने कहा, ''दाल की कीमतें आसमान पर चली गईं, महंगाई दुगनी हो गई, बरोजगारी बढ़ ही रही है। उम्मीद करेंगे की उनके हाथ से कुछ भला हो जाए, हालांकि अभी तक के जो असार है, उससे हमारी उम्मीदें खत्म होती जा रहा है।"
मोदी का नाम लिए बगैर मदनी ने कहा कि सबका साथ सबका विकास की बात हो रही थी, तब देश ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया और जब बीच में गड़बड़ शुरु हुई तो दिल्ली से भी खाली भेज दिया और बिहार से भी। उन्होंने कहा कि अगर वे (मोदी) अभी भी सुधार कर लें और सबकी बात करने लगें तो भारत उन्हें फिर सिर पर बिठाएगा।