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सामने आया पेशावर हमले के मास्टरमाइंड का चेहरा

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दुनियाभर को हिलाकर रख देने वाले पेशावर हमले और 132 मासूमों के कातिल मास्टरमाइंड का चेहरा सामने आ गया है। तालिबान पाकिस्तान के दुर्दांत आतंकियों ने 36 साल के उमर मंसूर के कहने पर इस हमले को अंजाम दिया।
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खुद तालिबान ने गुरुवार को वीडियो जारी कर इस बात का खुलासा किया। तीन बच्चों का पिता उमर मंसूर तालिबान का दुर्दांत आतंकी कमांडर है जिसे स्लिम नाम से भी जाना जाता है।

वीडियो के अनुसार उमर मंसूर के कहने पर ही तालिबानी आतंकियों ने इस घटना को अंजाम दिया। तालिबान द्वारा जारी किए गए वीडियो में खुद मंसूर इस बात की तस्दीक करते हुए कहता है कि यदि पाकिस्तानी सेना उनके बच्चों और औरतों को इस तरह मारेगी तो उनके बच्चों और परिजनों को भी नहीं बख्शा जाएगा।
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वीडियो में छाती तक दाढ़ी लिए यह शख्स उंगली का इशारा करते हुए 16 दिसंबर की घटना को जायज ठहराते हुए कहता है कि यह सब पाकिस्तानी आर्मी को सबक सिखाने और बदला लेने के लिए किया गया है।

स्कूलों पर आगे भी हमले करने की चेतावनी

तालिबान आंतकियों में खलीफा के नाम से मशहूर उमर मंसूर वीडियो में पाकिस्तानी सेना को धमकी देते हुए कहता है कि अगर उनके परिवारों पर हमले बंद नहीं किए गए तो इसी तरह अन्य स्कूलों और पाक आर्मी के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा।

तालिबान के अनुसार सीने पर विस्फोटक बांधकर खुद को उड़ाने वाला तालिबान आतंकवादी सेना के लिए एक संदेश है, कि आगे भी इस तरह उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। वहीं इस दौरान मंसूर ने यह आरोप भी लगाया कि सेना बिना किसी न्यायिक कार्रवाई के उनके साथियों को मौत के घाट उतार रही है।

हालांकि यह आरोप नया नहीं है, अदालते कई ऐसे मामलों की सुनवाई कर रही हैं जहां सुरक्षा बलों की गिरफ्त से कुछ दहशतगर्द फरार हो गए, जबकि बाद में उनमें से कुछ के शव बरामद किए गए। जिनके हाथ और पांव बंधे हुए थे।
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वीडियो में पाक सेना पर लगाया हत्याओं का आरोप

वहीं इस संबंध में एक सुरक्षा अधिकारी कहते हैं कि अदालतें भ्रष्ट और आंतकियों से दहशत में रहती हैं, इसलिए वो आत‌ंकियों को ज्यादातर मामलों में छोड़ देती हैं। वो गुस्से में कहते हैं कि आप अपनी जान की बाजी लगाकर इन लोगों को गिरफ्तार करते हैं और अदालतें उन्हें छोड़ देती हैं, ऐसे में अगर आप उन्हें नहीं मारोगे तो वो दोबारा लौट आएंगे।

दूसरी ओर मंसूर के बारे में पता चला है कि उसने इस्लामाबाद में हाईस्कूल तक की पढ़ाई की है। इससे पहले वह एक मदरसे में गया था। मंसूर के दो भाई हैं और उसने कुछ समय कराची में मजदूरी करते हुए बिताया था।

इसके बाद सन 2007 के आसपास वह तालिबान का सदस्य बन गया। पेशावर में 132 बच्चों की जान लेने वाला मंसूर खुद दो बेटी और बेटे का पिता है। वालीबॉल खेलने का शौकीन मंसूर अपने अड्डे पर हर समय वालीबॉल खेलने के लिए नेट साथ रखता है।
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