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आईएसआई का चहेता था मसूद अजहर

Sat, 09 Feb 2013 08:33 PM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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11 साल पहले लोकतंत्र के मंदिर संसद पर हमले को आतंकवादी गुट जैश ए मोहम्मद ने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर अंजाम दिया था। हमले की सफलता ने जैश के प्रमुख मसूद अजहर को पाक सेना और आईएसआई का चहेता बना दिया।
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हालांकि इस सफलता के नशे में मसूद अपने मुल्क और अमेरिका के खिलाफ मनमानी करने लगा। इससे खफा होकर पाक सेना और आईएसआई ने जैश को कमजोर कर दिया और भारत विरोधी कार्रवाई की कमान लश्कर ए ताइबा प्रमुख हाफिज सईद को सौंप दी।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक संसद पर हमले की कामयाबी के बाद मसूद अजहर ने पाक विरोधी कट्टरपंथी संगठनों से साथ मिलकर सरकार को ही आंखें दिखाना शुरू कर दिया था और अमेरिका के खिलाफ भी आग उगलने लगा था।
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उस दौरान मसूद के कद का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आईएसआई ने अफगानी तालिबान की मदद से उसे जम्मू कश्मीर की जेल से छुड़ाने के लिए कंधार विमान अपहरण को अंजाम दिया। हाईजैकिंग में इंडियन एयरलाइंस की आईसी 814 में सवार 176 बंधकों को छुड़ाने के एवज में भारत को मसूद को दो अन्य खतरनाक आतंकियों से साथ पाकिस्तान के हवाले करना पड़ा था। दिसंबर 1999 में रिहा हुए मसूद ने लगभग दो साल की तैयारी के बाद 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमला करवाया।

उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने संसद हमले के सात साल बाद अपने नए गुर्गे हाफिज सईद के जरिए 2008 में मुंबई में हमला करवाया। इस बीच 2006 में मुंबई ट्रेन में सीरियल धमाकों सहित कई आतंकी वारदात हुईं जिनमें सीधे तौर पर लश्कर का हाथ था।

सूत्रों के मुताबिक लश्कर पाकिस्तान का चहेता इसलिए बना हुआ है कि वह ना तो तथाकथित जिहाद के नाम पर पाक सरकार के खिलाफ कार्रवाई करता है न ही अमेरिका के खिलाफ कोई बयान देता है। इसी को लेकर सईद ने दो दिन पहले बयान दिया था कि वह पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है और अमेरिका उसके सिर करोड़ों डालर का इनाम रखने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा।

हालांकि मसूद अजहर भी पाकिस्तान में फिलहाल सुरक्षित है और भारत के मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल है लेकिन पाकिस्तानी एजेंसियों ने उसकी ताकत खत्म कर दी है। पाकिस्तान यह नहीं चाहता कि वह किसी भी तरह भारतीय एजेंसियों के हाथ लग जाए। लिहाजा उसे पाकिस्तान से बाहर नहीं निकलने दिया जाता।
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