भारत के मंगलवार को मंगलयान के सफल परीक्षण की खबर देश और दुनिया में छाई रही।
अमेरिकी मीडिया ने इसे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की तकनीकी उपलब्धि और चीन पर सांकेतिक बढ़त करार दिया है, वहीं चीन के सरकारी प्रभाव वाले मीडिया ने इसे पड़ोसी देश की एक बड़ी कामयाबी करार दिया है।
स्ट्रीट जर्नल ने लिखा कि यदि मंगल मिशन सफल हो जाता है तो यह भारत की एक बड़ी तकनीकी सफलता होगी। इससे वह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी चीन और जापान को पीछे छोड़ देगा।
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इसी तरह सीएनएन ने लिखा कि यदि यह मिशन सफल होता है तो भारत लाल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला एशियाई देश बन जाएगा और वह चीन पर सांकेतिक बढ़त हासिल कर लेगा।
सीएनएन से यूएस नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल के प्रोफेसर डॉ. जेम्स क्ले मोल्त्च ने कहा कि वह मानते हैं कि भारतीय नेतृत्व यह सोचता है कि हाल में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में चीन की उपलब्धियों से एशिया में उसकी हैसियत को खतरा है और इसी कारण वह जवाब देने की जरूरत महसूस करता है।
एक अन्य विशेषज्ञ आस्ट्रेलियन एकेडमी आफ साइंस के प्रोफेसर रसेल बॉयसे ने कहा कि इस मिशन से कोई ऐसा तथ्य सामने नहीं आने वाला है जिससे कि काफी कुछ बदल जाए लेकिन जो भी हासिल होगा वह पहली कोशिश में प्राप्त जानकारी होगी जिससे भारत की क्षमता का पता चलेगा।
उधर, चीन के एक विशेषज्ञ ने मंगलयान के सफल प्रक्षेपण को एक महान उपलब्धि करार देते हुए कहा है कि अगर यह सफल हो जाता है तो इस मुकाम पर पहुंचने वाला भारत पहला एशियाई देश होगा। इस उपलब्धि के लिए भारत बधाई का हकदार है।
चीन के एकेडमी आफ सोशल साइंस के दक्षिण एशिया मामलों के जानकार ये हैलिन ने कहा कि चीनी लोगों की तरह भारतीय लोगों के भी अंतरिक्ष के बारे में अपने सपने हैं। यदि मंगलयान का प्रक्षेपण सफल हो जाता है तो तमाम तरह की जानकारियां हासिल होगी और उससे हमारा जीवन बदलेगा।
चीन के सरकारी समाचार पत्रों ने इस खबर को पहले पृष्ठ पर जगह देते हुए मंगल के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के मामले में भारत से चीन के आगे निकलने का जिक्र किया है। ये भी कहा कि अंतरिक्ष की खोज के बारे में प्रतिद्वंद्विता करने की बजाय भारत और चीन इस क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं।