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'शादी में कुछ भी धार्मिक नहीं, लगेगा सर्विस टैक्स'

Sat, 21 Sep 2013 12:58 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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शादी एक सामाजिक संस्था है, जिसका वजूद धर्म के अस्तित्व में आने से काफी पहले से है, इसलिए यह दलील देना बेकार है कि शादी एक धार्मिक समारोह है।
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कानून भी रजिस्टर होने वाली शादियों को शादी का वैध स्वरूप मानता है, इसलिए इस तरह की रजिस्टर्ड शादियों के साथ किसी भी तरह का धार्मिक पवित्रता नहीं जुड़ी है।

कस्टम, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कहा, "धार्मिक अनुष्ठान या किसी और तरह से अगर शादी हो, तो भी इसका यह मतलब नहीं कि वह धार्मिक समारोह है।"
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वह कोल्हापुर में एक शादी समारोह के लिए किराए पर दिए गए हॉल से मिली कमाई पर सर्विस टैक्स देनदारी से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने कहा कि इस मामले में सर्विस टैक्स देना ही होगा।

दरअसल, मामला यह है कि सेंट्रल पंचायत के पास एक हॉल है, जो वह शादियों के लिए किराए पर देता था। सर्विस टैक्स विभाग ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों पर लेवी लगता है।
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विभाग ने उससे जुलाई 2009 से मार्च 2004 तक के लिए 1.08 लाख रुपए और अप्रैल 2004 से सितंबर 2004 तक की अवधि के लिए 24 हजार रुपए मांगे।

हॉल मैनेजमेंट को टैक्स भरने के लिए कहा गया और पेनल्टी भी लगाई गई। मैनेजमेंट के वकील ने दलील दी कि शादी एक धार्मिक अनुष्ठान है और इस पर टैक्स नहीं बनता। लेकिन आखिरकार यह दलील खारिज हो गई।
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