अब रेड कॉरीडोर की हदें टूटने लगी हैं। नक्सलवाद की पैठ सिर्फ छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के घ्ाने जंगलों में ही नहीं रह गई है। यह संगठन आपके घरों में घुसने की फिराक में है।
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के काफिले पर हुए नक्सली हमले के बाद सोशल मीडिया पर भी लाल झंडा फहरता दिखने लगा है। फेसबुक पर लाल सलाम का समर्थन करने वाले लोग हजारों की तादाद में नजर आ रहे हैं।
फेसबुक पर नक्सल छत्तीसगढ़
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर हाल ही में नक्सल छत्तीसगढ़ नाम से एक प्रोफाइल बनी है, जिस पर खतरनाक हथियारों की खरीद-फरोख्त की बात खुलेआम हो रही है। इतना ही नहीं, इस पर नक्सली एजेंडा भी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
खास बात यह है कि कुछ स्टेटस अपडेट कोड में किए जा रहे हैं, तो कुछ खालिस छत्तीसगढ़ की बोली में। फेसबुक प्रोफाइल किसी महिला की है, जिसमें करीब 300 लोग जुड़े हुए हैं।
हो रहा विचारधारा का प्रचार
इस प्रोफाइल के अबाउट सेक्शन में नक्सली ऑपरेशंस की चुनिंदा जानकारी दी गई है। मकसद साफ नजर आता है कि इसके जरिए न सिर्फ विचारधारा और मजबूत नेटवर्क का प्रचार किया जा रहा है, बल्कि लोगों को उकसाने की भी कोशिश की जा रही है।
फ्रेंड लिस्ट में भाजपा और कांग्रेस!
इस प्रोफाइल में भाजपा रायगढ़ के आईटी सेल के डिस्ट्रिक को-ऑर्डिनेटर भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, फ्रेंड लिस्ट में कांग्रेस के किसी रितेश राय, तेलंगाना राष्ट्र समिति की यूथ विंग के एक सदस्य और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के प्रतीक सेनगुप्ता भी जुड़े हुए हैं।
हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं है कि ये प्रोफाइल असली हैं। दिलचस्प बात है कि प्रोफाइल से जुड़े ज्यादातर लोग युवा हैं।
दिग्गजों पर है नजर!
इस प्रोफाइल को ऑपरेट करने वाले की निगाह सिर्फ आम युवाओं पर ही नहीं, छत्तीसगढ़ के नेताओं और अधिकारियों पर भी है।
छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत और राज्य हज कमेटी के चेयरमैन सलीम राज के साथ रेलवे और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की फेसबुक प्रोफाइल को यहां से फॉलो किया जा रहा है।
फेसबुक पर हजारों चाहने वाले
फेसबुक पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों की तादाद हजारों में है। इस साइट पर मौजूद करीब 3000 लोगों को नक्सलाइट मूवमेंट में दिलचस्पी है।
इतना ही नहीं, हर वक्त करीब दर्जन भर लोग इस मुद्दे पर बात कर रहे हो हैं। इसके अलवा, माओवाद विचारधारा का समर्थन करने वालों की तादाद भी करीब 9000 है।
'माओइस्ट रेबल न्यूज' नाम के पेज से भी करीब 1200 लोग जुड़ हुए हैं। इसी तरह, 'लाल सलाम' नाम के ग्रुप से करीब 300 युवा जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, ट्विटर के आंकड़े जुटाने वाली वेबसाइट टॉप्सी के आंकडों के मुताबिक पिछले सात दिनों में करीब 10 हजार ट्वीट सिर्फ नक्सल हैशटैग के साथ किए गए हैं।
कुल मिलाकर, सिर्फ फेसबुक पर ही माओवाद और नक्सलवाद से जुड़े करीब दर्जनभर पेज और प्रोफाइल मौजूद हैं।
भले ही इनका कोई विध्वंसक मकसद न हो, पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नक्सली विचारधारा के प्रचार के लिए जोर-शोर से सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
इस बारे में साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं 'मेरे नज़रिए से इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 66 (f) के तहत साइबर क्राइम का केस चलना चहिये।
मेरी जानकारी के मुताबिक, इसको लेकर वहां की पुलिस अधिकारी श्वेता सिन्हा ने 1 जून को ही फेसबुक के पास शिकायत दर्ज करा दी है। लेकिन, इस पर कार्रवाई न करना कानूनन जुर्म है और इसके लिए फेसबुक के शीर्ष मैनेजमेंट को 5 साल तक का कारावास हो सकता है या उन पर 5 लाख रुपये जुर्माना लग सकता है।'