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अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई ‘बेटी’

Wed, 02 Jan 2013 08:54 AM IST
बलिया/वाराणसी/अखिलानंद तिवारी
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नये साल का पहला दिन खामोशी की चादर में ढका रहा। पिकनिक व बधाई की जगह लोग एक-दूसरे का दर्द बांट रहे थे। सैकड़ों कदम अचानक एक साथ नदी तट की तरफ मुड़ पड़े थे। मौका था देश की ‘बेटी’ की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने का। वही बेटी, जिसकी दिल्ली में न केवल दरिंदों ने अस्मत लूटी बल्कि उसे इतनी पीड़ा दी कि वह दर्द में कराहते हुए दुनिया छोड़ गई।
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मंगलवार को गंगा भी मौन थीं। चारो ओर उदासी की चादर फैली थी। बेटी का पूरा कुनबा यहां घाट पर मौजूद था। जानने-पहचानने वाले सैकड़ों लोग भी यहां थे मगर नहीं थी तो उनकी प्यारी बेटी। गंगा में प्रवाहित हो रही अस्थियां मानों सवाल पूछ रही थीं कि बेटियां क्यों पैदा होती हैं? उन्हें क्यों हवस का शिकार बनाया जाता है? आखिर दरिंदे कब तक भेड़ियों की तरह झपटते रहेंगे? कब होगा इसका अंत? क्या सदियां इसी तरह गुजरती रहेंगी और बेटियां हवस का शिकार होती रहेंगी?

गंगा में विलीन बहादुर बेटी अपने पीछे अनगिनत सवाल छोड़ गई। उसके सवालों का जवाब शायद ही किसी के पास हो। बेटी का सवाल मीडिया से भी था कि वह उसके साथ हुई दरिंदगी के बाद ही क्यों जागी? सवाल तो यह भी था यदि मीडिया नहीं जागती, तो क्या बेटी देश को जगा पाती? क्या वाकई देश जाग गया है? क्या अब कोई बेटी ऐसी मौत नहीं मरेगी? ऐसे कई सवाल लोगों के जेहन को कुरेद रहे थे। जिस बेटी के शव को लेने प्रधानमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष हाड़ कंपाने वाली ठंड में एयरपोर्ट पहुंचे थे, जिसकी अंत्येष्टि में दिल्ली की सरकार पूरे समय मौजूद रही, उसी बेटी के अस्थि विसर्जन में मंगलवार को स्थानीय प्रशासन के एक भी नुमाइंदे का नहीं पहुंचना कई सवाल खड़ा कर गया।
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बिटिया की मूरत के आगे सूरत बदलने की शपथ
मंगलवार की दोपहर अस्सी घाट पर माहौल बिल्कुल अलग था। एक तरफ गंगा पार रेत पर जहां बहुत से लोग मौज मस्ती में मशगूल थे, वहीं अस्सी घाट पर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन एवं आइसा के बैनर तले बुद्धिजीवी और विद्यार्थी दिल्ली गैंगरेप प्रकरण को लेकर सभा में मंथन कर रहे थे।

सभा की शुरुआत से पहले काशी के युवा शिल्पियों की ओर से दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की प्रतीक मूरत का अनावरण कर, मूर्ति जनता को समर्पित की गई। इस मूरत के आगे समाज की सूरत बदलने की शपथ ली गई। सभा में तय किया गया कि जब तक दुष्कर्म जैसे अपराध के लिए सख्त कानून और दिल्ली गैंगरेप मामले में दोषियों को जनता की इच्छा के अनुसार सजा नहीं मिल जाती, इस संघर्ष को सड़क पर जारी रखा जाएगा। यह चेतावनी भी दी गई कि रचनात्मक विरोध प्रदर्शन सरकार के टालू रवैये के चलते उग्र भी हो सकता है।
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