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लोकसभा के नतीजे तय करेंगे कई मुख्यमंत्रियों का भविष्य

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लोकसभा चुनाव के नतीजे कई राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों का भी भविष्य तय करेंगे। खराब प्रदर्शन कई राज्यों में जहां नए चुनाव की नींव तैयार कर सकता है, वहीं कई मुख्यमंत्रियों की कुर्सी के लिए खतरे की घंटी भी बजा सकता है।
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इनमें झारखंड की सरकार पहले से ही अल्पमत में है तो बिहार की नीतीश सरकार के पास फिलहाल बहुमत से एक भी ज्यादा विधायक नहीं है। इन राज्यों में सत्तारूढ़ दल का खराब प्रदर्शन जोड़ तोड़ की राजनीति को चरम पर पहुंचा सकता है।

हरीश रावत की भी बढ़ सकती हैं मुश्क‌िलें

उत्तराखंड में अगर कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज ने अपने तेवर दिखाए तो हरीश रावत सरकार के लिए परेशानी बढ़ सकती है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में हालांकि कांग्रेस सरकार के पास बहुमत है, मगर चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी आलाकमान इन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन पर गंभीरता से विचार कर सकता है।

झारखंड में भी सरकार अल्पमत में

यही कारण है कि इन सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने आम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए अपनी सारी ऊर्जा लगा दी है।
आम चुनाव के नतीजे कई राज्यों की राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव डालेंगे।

खासतौर पर बिहार और झारखंड में जहां वर्तमान सरकार अल्पमत में है। इन चुनाव में बुरा प्रदर्शन पार्टी की विदाई की पटकथा तैयार कर सकती है।

सोरेन सरकार पर भी सकंट के बादल

झारखंड में 79 सदस्यीय विधानसभा में हेमंत सोरेन सरकार के पास फिलहाल स्पीकर समेत 39 विधायक ही हैं। इस प्रकार सोरेन सरकार अल्पमत में आ गई है। चुनाव में बेहतर नतीजे न आने पर झामुमो में फूट तय है।

वैसे भी पार्टी के दो विधायक इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं तो साइमन मरांडी को हेमंत ने मंगलवार को ही मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया है।

पड़ सकती है कई दलों में फूट

इस प्रकार यहां सत्ता की चाबी तृणमूल कांग्रेस के पास है। इस पार्टी में कांग्रेस के एक और दो निर्दलीय विधायक हाल ही में शामिल हुए हैं।
 
झारखंड की तरह बिहार की नीतीश कुमार सरकार के पास भी कांग्रेस, निर्दलीय, भाकपा के नौ विधायकों और स्पीकर के साथ महज 122 विधायक ही हैं। वहां चुनाव में बुरे प्रदर्शन के बाद जदयू में फूट पड़ने के आसार हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने मंगलवार को जदयू के 52 विधायकों के बगावत के लिए तैयार होने की बात कही। अगर यहां राजद ने कांग्रेस पर नीतीश सरकार को गिराने का दबाव डाला तो सरकार का बचना मुश्किल हो जाएगा।

इसी प्रकार उत्तराखंड में बसपा व निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही रावत सरकार के लिए भी चुनाव बाद परेशानी बढ़ सकती है।
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सतपाल महाराज डालेंगे फूट

भाजपा ने अगर यहां जबरदस्त प्रदर्शन किया तो उसकी कोशिश सतपाल महाराज के जरिए कांग्रेस में फूट डालने की होगी। इन सबके इतर आम चुनाव में हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।

माना जा रहा है कि इन राज्यों में आम चुनाव में अगर पार्टी का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा तो आलाकमान नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर सकता है। खासतौर से कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ पार्टी में विरोध के सुर तेज हो सकते हैं।
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