गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के मंत्री नारायण राणे ने मुझे फोन करके अपने बेटे को छुड़ाने को कहा था।
मंगलवार को इन लोगों को टोल बूथ पर तोड़फोड़ और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट करने के आरोप में गोवा-महाराष्ट्र सीमा पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
हालांकि रात को ही नीतेश राणे और उनके तीन समर्थकों को जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
पार्रिकर ने कहा, ‘राणे ने मुझे फोन किया था। उन्होंने मुझसे निवेदन किया कि मामले को देखें और अगर संभव हो तो नीतेश को रिहा कराएं।
जिस पर मैंने उनसे कोर्ट से संपर्क करने को कहा।’ पार्रिकर ने कहा कि आग्रह टाले जाने पर नारायण राणे की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक थी और वह न तो गुस्सा हुए और न ही उन्होंने आपा नहीं खोया।
नीतेश के नेतृत्व में मंगलवार को गोवा का एक ग्रुप निजी कारों से जा रहा था और पेरनेम गांव के टोल प्लाजा पर उन्होंने टोल फीस देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद हाथापाई की नौबत आई।
पार्रिकर के मुताबिक, ‘यह घटना इसलिए नहीं हुई कि नीतेश के पास टोल बूथ को चुकाने के लिए पैसे नहीं थे। पांच सौ रुपये उनके लिए कुछ नहीं थे। दरअसल, यह अपने अधिकारों का प्रदर्शन था।’